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महीने में एक बार पकता है मिडडे मील

Wed, 27 Apr 2016 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
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foods to keep young - फोटो : getty images
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तमाम कोशिशों के बाद भी ग्रामीण इलाकों में मिडडे मील योजना पूरी तरह से परवान नहीं चढ़ पा रही है। स्थिति यह है कि  कई स्कूलों में कभी कभार ही मिडडे मील पकता हैं। घरों से खाली टिफिन लेकर स्कूल पहुंचने वाले बच्चे भूखे पेट लौटने को मजबूर हैं। हम बात कर रहे हैं माधौगढ़ क्षेत्र के गांव सरावन व इससे सटे गांवों में चल रहे आधा दर्जन से अधिक प्राथमिक,
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जूनियर व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों की। यहां महीने में सिर्फ एक बार मिडडे मील पकाया जाता हैं, वह भी मानक के अनुसार नहीं होता हैं। उसमें भी सभी बच्चों मिडडे मील नहीं दिया जाता। अभिभावकों को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने विभागीय अफसरों से विद्यालयों में मिडडे मील न बनने की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद भी जिम्मेदार खामोश हैं। इसका

फायदा विद्यालय प्रबंधक उठा रहे हैं और शासन की एक महत्वपूर्ण योजना खटाई में पड़ती जा रही है।  तहसील दिवस में गुहार लगाकर थके ग्रामीणों ने अब डीएम संदीप कौर से इस मामले की शिकायत की हैं। शिकायती पत्र में सरावन निवासी रामप्रकाश, रामकुमार, बहादुर, शाकिर अली, मुबीन अली, रामप्रकाश, माताप्रसाद, घनश्याम, इंद्रपाल, श्रीपाल आदि का
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कहना है कि ग्रामीण इलाकों में खुले विद्यालयों में मिडडे मील व्यवस्था का बुरा हाल हैं। विद्यालय के जिम्मेदार मिडडे मील परोसने का पैसा हजम करने में लगे हैं। ग्रामीणों ने जांच कराकर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

पर्याप्त मिलता हैं कनवर्जन कास्ट का पैसा
बताते चलें कि शासन की ओर से मिडडे मील योजना केे लिए भरपूर पैसा खर्च किया जा रहा है। प्राथमिक में 3.86, जूनियर विद्यालय और पूर्व माध्यमिक में 5.78 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से कनवर्जन कास्ट का पैसा दिया जाता हैं। बावजूद इसके विद्यालय के जिम्मेदार इसमें उदासीनता बरत रहे हैं।

वर्जन
मिडडे मील योजना शासन की प्राथमिकता में हैं। यदि विद्यालयोें में मिडडे मील नहीं पक रहा है तो औचक निरीक्षण करेंगे। अगर इस तरह इस तरह की खामी मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। -विनोद कुमार, एबीएसए, माधौगढ़
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