फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मड़ाई में गेहूं कम देख निकला किसान का दम

Fri, 08 Apr 2016 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
विज्ञापन
शहर स्थित पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बैठे परिजन। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे किसानों का हाल बेहाल है। बर्बादी का सदमा कहीं किसानों की जान ले रहा है तो कहीं अन्नदाता खुद ही जिंदगी का साथ छोड़ रहा है। गुरुवार की देर रात खेत पर मड़ाई के दौरान गेहूं की कम उपज देख किसान को सदमा लगा और वह खेत में ही बेहोश हो गया। परिजन उसे जिला अस्पताल ला रहे थे, तभी रास्ते में उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन


कोटरा थाना क्षेत्र के गांव बरसार निवासी परमेश्वरी दयाल पाल (50) पुत्र रामचरन एक एकड़ जमीन का मालिक था। पिछले दिनाें सूखा व प्राकृतिक आपदाआें के कारण उसकी फसल खराब हो गई थी। केवल गेहूं की फसल ही ठीक थी और बीते दिनों बारिश से वह भी खराब हो गई। गुरुवार की शाम परमेश्वरी अपनी फसल की मड़ाई करने के लिए खेत पर गया था।

गेहूं की उपज महज दो क्विंटल बीघा की दर से हुई। यह देख परमेश्वरी का दिल बैठने लगा और उसके सीने में दर्द होने लगा। इसके बाद वह अचेत हो गया। सूचना पर पहुंचे परिजन उसे जिला अस्पताल ला रहे थे लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। सूचना पाकर थाना पुलिस गांव पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थानाध्यक्ष एके सिंह ने रिपोर्ट आने के
विज्ञापन


बाद ही कुछ कह पाने की बात कही है। परिजनाें ने किसान की मौत पर जिला प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। बता दें जिले में इस साल किसानाें का हाल बुरा है। पहले सूखा

और इसके बाद प्राकृतिक आपदाआें से किसान टूट गया है। उसे अब यह समझ में नहीं आ रहा है कि जिंदगी की गाड़ी कैसे पार लगेगी। अब तक फसल खराब होने का सदमा कितने किसानों की जान ले चुका है और कितने परिवार बर्बाद हो चुके हैं इसकी गिनती करना भी मुश्किल हो रहा है।

फसल बर्बादी के आंकड़े
इस बार फसल बर्बादी की जो तस्वीर सामने आई, उसने जिले को झकझोर कर रख दिया है। इस साल तिल 61 प्रतिशत, उड़द 68, अरहर 84, ज्वार 90, बाजरा 91, मूंग 92 एवं सोयाबीन की 97 फीसदी फसल नष्ट हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें