जालौन। अक्षय तृतीया शुक्रवार को है। अबूझ मुहूर्त होने के कारण इस दिन किसी भी अच्छे काम की शुरुआत की जाती है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की आराधना में लीन होते हैं। स्त्रियां अपने और परिवार की समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करके श्री विष्णुजी और मां लक्ष्मी की प्रतिमा पर अक्षत चढ़ाना चाहिए। शादी के लिए जिन लोगों के ग्रह और नक्षत्रों का मिलान नहीं हो पाता या मुहूर्त नहीं निकल पाता। ऐसे लोगों को इस तिथि को दोष नहीं लगता और वह निर्विघ्न विवाह कर सकते हैं।
बता दें कि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। इस दिन जहां ब्राह्मण समाज के लोग भगवान परशुराम की पूजा करते हैं। वहीं, दूसरी ओर इस तिथि का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व है जो सालभर में पड़ने वाले अबूझ मुहूर्तों में से एक मानी जाती है। अक्षय तृतीया ऐसा मुहूर्त है जिसके लिए कोई ग्रह नक्षत्र अशुभ नहीं होता है। बिना कोई मुहूर्त निकलवाए आप कोई शुभ कार्य कर सकते हैं।
पंडित अरविंद बाजपेई बताते हैं कि इस तिथि पर सूर्य और चंद्र अपनी उच्च राशि में होते हैं। इसलिए इस दिन शादी, कारोबार की शुरूआत और गृह प्रवेश करने जैसे- मांगलिक काम बहुत शुभ रहते हैं। शादी के लिए जिन लोगों के ग्रह-नक्षत्रों का मिलान नहीं होता या मुहूर्त नहीं निकल पाता, उनको इस शुभ तिथि पर दोष नहीं लगता व निर्विघ्न विवाह कर सकते हैं। हालांकि इस साल भी अक्षय तृतीया के मुहूर्त में कोरोना का ग्रहण लगा है। पर ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर व्यक्ति घर पर ही दान पुण्य और जप-तप करें तो भी उसे शुभ फल की प्राप्ति होगी। पुराणों में उल्लेख है कि अक्षय तृतीया सभी पापों का नाश करने वाली एवं सभी सुखों को प्रदान करने वाली तिथि है। इस दिन किया गया दान-पुण्य एवं सत्कर्म अक्षय रहता है अर्थात कभी नष्ट नहीं होता। वैसे तो इस दिन कोई भी व्यक्ति अपनी भावना और श्रृद्धा के अनुसार कुछ भी दान करके पुण्य लाभ कमा सकता है। परन्तु ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि आप अपनी राशि के अनुसार अक्षय तृतीया पर दान पुण्य और पूजा पाठ करें तो आपकी सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होंगी।