उरई। बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुंदेलखंड के प्रभारी रहे शमशुद्दीन राईन को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। वह तीन बार प्रभारी रहे हैं। उनके पार्टी से हटते ही जिले की राजनीति में भी बदलाव भी देखने को मिल सकता है। पार्टी के जुड़े नेताओं का कहना है कि जिले के कई पदाधिकारी उनके चहेते थे। वह उन्हें इसका लाभ भी पहुंचा रहे थे। उनके निष्कासन से अब पार्टी खेमे में खींचतान मच सकती है।
झांसी निवासी शमशुद्दीन राईन को बसपा सुप्रीमो का खास माना जाता है। वह बुंदेलखंड के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। गुरुवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
उन पर आरोप लगा है कि वह लगातार पार्टी में रहकर अनुशासनहीनता कर रहे थे। वह बुंदेलखंड के तीन बार प्रभारी रहे। इस पर जिले के कई नेता उनके आशीर्वाद से जिलाध्यक्ष व कोऑर्डिनेटर तक बन जाते थे। उनका रुतबा ऐसा था कि जिसको चाहे वह पद से नवाज देते थे। इसी का फायदा यहां के कुछ नेता भी उठा रहे थे। पार्टी नेताओं की माने तो झांसी जिले के निवासी होने के बावजूद उनका जालौन जिले की राजनीति में भी उनका खूब दखल था।
जिले के कुछ लोगों को वह मंडल पदाधिकारी तक बनवा दिए थे। अब उनके निष्कासित होते ही उनके चहेतों पर भी कार्रवाई की तलवार लटकती हुई दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि जिले की बसपा की राजनीति में कुछ नया होने वाला है।