छठ महापर्व के तीसरे दिन रविवार को रामकुंड व माहिल तालाब पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हाथों में पूजा की थाली लिए व्रती महिलाएं परिवार संग तालाब पहुंची। यहां पर सूर्य के अस्त होते ही छठ मइया के जयकारे के साथ अर्घ्य देकर पूजा अर्चना की। महिलाओं ने ढोलक मंजीरा के साथ भजन कीर्तन प्रस्तुत कर भगवान भास्कर की आराधना की। जनपद में छठ
महापर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। तीसरे दिन निर्जला उपवास रखने वाली महिलाओं ने माहिल तालाब व रामकुंड पहुंचकर पानी में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया। हाथ में सूप लेकर खड़ी महिलाओं ने अर्घ्य देने के बाद ठोकवा, पुल, ईख, अदरक, मूली और मिष्ठान का भोग लगाया और फिर भगवान सूर्य की आराधना कर छठ मइया की पूजा अर्चना की। इसके
साथ ही अगले दिन यानि चौथे दिन सूर्य भगवान के जल्द उदय होने की मनुहार की। तालाब के किनारे महिलाओं ने भजन कीर्तन कर भगवान सूर्य व छठ मइया का गुणगान किया। सुमन साहनी ने कहा कि इस पर्व का पूरे साल इंतजार रहता है। धार्मिक आस्था व विश्वास के इस पर्व पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। 36 घंटे तक महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं।
संजय साहनी ने कहा कि इस बार उनके घर में यह पूजा नहीं हो सकी लेकिन उन्होंने आस्था पूरी है। छठ पर्व मुख्यतया बिहार व पूर्वांचल क्षेत्र में मनाया जाता है। यहां भी तकरीबन 250
परिवार इस पर्व को मनाते है। रामकुंड व माहिल तालाब पर श्वेता आनंद, संजीव साहनी, खुशहाल, मनोरमा तिवारी, केएन श्रीवास्तव, नित्य प्रकाश उपाध्याय, नंदलाल गुप्ता, बसंत मिश्र, कृष्णकांच पांडेय, मुकेश श्रीवास्तव, धंनजय, हर्षिता, डिंपल आदि ने बड़ी श्रद्धा से छठ पर्व पर छठ मइया व भगवान सूर्य की आराधना की।