उरई। बाइक खड़ी करने को लेकर हुए विवाद में युवक की चाकू से हत्या करने वाले को एससी-एसटी कोर्ट ने आजीवन कारावास सुनाया है। न्यायालय ने दोषी नरेंद्र यादव पर 53 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं मामले में नामजद दो सह आरोपियों वीर सिंह और गंगाचरण को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर दोषमुक्त कर दिया गया।
शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नया रामनगर, अजनारी रोड निवासी रागिनी जाटव ने 23 मई 2020 को कोतवाली उरई में तहरीर दी थी। बताया गया कि उसका भाई हेमंत उर्फ रंजीत घर के बाहर मौजूद था। इसी दौरान नरेंद्र यादव ने उसके घर के सामने बाइक खड़ी कर दी। बाइक हटाने को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया।
तहरीर के मुताबिक विवाद के दौरान वीर सिंह ने बाइक हटाने से मना करते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी। इसी बीच नरेंद्र का भाई गंगाचरण भी मौके पर पहुंच गया। शोर सुनकर रागिनी की बहन अंजली और मां मालती देवी भी बाहर आ गईं और बीच-बचाव करने लगीं।
इसी दौरान नरेंद्र यादव ने चाकू से हेमंत उर्फ रंजीत की गर्दन पर वार कर दिया। हमले में हेमंत गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। झांसी पहुंचने पर चिकित्सकों ने हेमंत को मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद पुलिस ने नरेंद्र यादव, वीर सिंह और गंगाचरण के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। हेमंत की उपचार के दौरान मौत होने के बाद मुकदमे में हत्या की धारा 302 की बढ़ोतरी की गई। पुलिस ने नरेंद्र यादव को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर चाकू बरामद करने का दावा किया। विवेचना पूरी होने के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
मामले की सुनवाई एससी-एसटी कोर्ट में हुई। अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी सुरेश कुमार गुप्ता ने नरेंद्र यादव को धारा 302 के तहत दोषी ठहराया। न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास और 53 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं वीर सिंह और गंगाचरण के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया।