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निजीकरण के विरोध में एलआईसी में हड़ताल, नारेबाजी

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जालौन। निजीकरण के विरोध में एकजुट हुए कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारी, मजदूर यूनियन आदि संगठनों के सदस्यों ने धरना-प्रदर्शन कर कार्य बहिष्कार किया। सभी ने एकजुट होकर निजीकरण प्रक्रिया समाप्त किए जाने की मांग की।
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उरई में संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले पहले दिन अधीक्षण अभियंता के कार्यालय में निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने कार्य बहिष्कार किया। इस दौरान अधिशासी अभियंता वीके मिश्रा ने कहा कि वर्तमान में प्रबंधन भय का वातावरण बनाकर कर्मचारियों का शोषण कर रहा है। विद्युत विभाग में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी दिन-रात विषम परिस्थितियों में कार्य कर उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में प्रयासरत रहते हैं। इसके लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध न कराकर विभाग को निजीकरण की आग में झोंकना गलत है। उन्होंने निजीकरण के लिए जारी किए गए मसौदे को तत्काल वापस लेने और इसकी सारी प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की। कहा कि बिजली कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली लागू की जाए। इस दौरान अधिशासी अभियंता दीपक सिंह, सहायक अभियंता गौरव शर्मा, अखिलेश यादव, शैलेंद्र सिंह, अभिषेक सिंह, सुमित साहू, रामू गुप्ता आदि मौजूद रहे।
निजीकरण के विरोध में एलआईसी में हड़ताल, नारेबाजी
उरई/जालौन। सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों के निजीकरण के खिलाफ एवं लंबित वेतन संशोधन को लेकर ऑल इंडिया इंश्योरेंस एंप्लाइज एसोसिएशन के आवाहन पर भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की स्थानीय शाखा में कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इस दौरान एलआईसी में कामकाज प्रभावित हुआ।
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कानपुर डिवीजन एंप्लाइज एसोसिएशन की स्थानीय शाखा अध्यक्ष सुशील कुशवाहा एवं सचिव अफसर अहमद के नेतृत्व में कर्मचारियों ने शाखा के गेट पर ताला डालकर सरकार की नीतियों का विरोध किया। सुशील कुशवाहा ने कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों का निजीकरण करना चाहती है। बीमा कंपनियां राजस्व जुटाने में अहम भूमिका निभाती हैं। इसके बाद भी कर्मचारियों के हितों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सरकार एलआईसी का आईपीओ लाना चाहती है, जो स्वीकार नहीं है। अफसर अहमद ने कहा कि विगत पांच वर्षों से लंबित वेतन और उनके पुनर्निर्धारण को लेकर भी सरकार विचार नहीं कर रही है। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। दो दिवसीय हड़ताल के चलते पॉलिसी धारकों और एजेंटों को बिना काम कराए लौटना पड़ा। हड़ताल में बीनू पंडित, नरेंद्र कुमार, रिजवान अहमद, रामकुमार, अबरार अहमद, अमित, विमल, शेखर श्रीवास्तव, गजेंद्र, राम कुमार आदि शामिल रहे। उधर, जिला मुख्यालय पर हुए प्रदर्शन में अध्यक्ष अनिल मोदी, शाखा सचिव राममोहन निरंजन, राधाकृष्ण गुप्ता, श्रीराम बघेल, रवि प्रकाश, श्रेया गौड़, कार्तिका, रविंद्र तारा सिंह आदि मौजूद रहे।
बैंकों में नहीं हुई हड़ताल
उरई। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के सचिव अमित राजपूत ने बताया कि हड़ताल में एसबीआई समेत बैंकें शामिल नहीं रहीं। बैंकों में सुचारु रूप से कामकाज होता रहा। (संवाद)
निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन, ज्ञापन दिया
उरई। आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन के बैनर तले प्रांतीय उपाध्यक्ष एवं पल्लेदार मजदूर यूूनियन के प्रदेश संयोजक राम सिंह के नेतृत्व में डीएम को ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में मांग की है कि पल्लेदारों को सरकार छह हजार रुपये प्रतिमाह भत्ता दे। आशा आंगनबाड़ी, रसोइया सभी को स्थायी कर्मचारी घोषित किया जाए और उनको 21 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए। इस दौरान हरिशंकर, शिवबालक, मानसिंह, हरिबाबू आदि मौजूद रहे। (संवाद)
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