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संरक्षित किया जाएगा लक्ष्मीबाई का कोषागार किला

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कालपी स्थित रानी का कोषागार किला। - फोटो : ORAI
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उरई/कालपी। किलाघाट पर स्थित रानी लक्ष्मीबाई के किले को संरक्षण प्रदान करने के लिए नहर विभाग की ओर से कार्ययोजना तैयार की गई है। नहर विभाग के सहायक अभियंता वसीम राजा की मानें तो ऐतिहासिक किले को यमुना नदी के पानी की कटान से बचाने के लिये दस करोड़ रुपये की लागत से कार्य कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि बजट आवंटित होते ही काम शुरू हो जाएगा।
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बता दें कि यमुना नदी के किनारे प्राचीन व ऐतिहासिक महत्व का प्राचीन किला बना हुआ है। मराठा शासनकाल में कोषागार के रूप में प्रयोग किया जाता था। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी शासन से युद्ध करने के लिए वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे,नाना साहब आदि क्रांतिकारियों ने मंत्रणा करके संघर्ष करने का बिगुल फूंका था। वर्तमान में प्राचीन किला वन विभाग के नियंत्रण में है। दरअसल ऊंचाई में बने इस किले से सटकर यमुना नदी निकली है। यमुना नदी की जलधारा बहने तथा हर साल बाढ़ के प्रकोप के कारण किले के परिसर की भूमि दिन प्रतिदिन कटाव होने से किला क्षतिग्रस्त होने की संभावना है। इसके मद्देनजर नगरवासियों ने दुर्ग को संरक्षित करने की मांग उठाई थी। जनप्रतिनिधियों व इतिहासविदों ने चंदेलकालीन दुर्ग को संरक्षित करने तथा यमुना नदी की कटान से किले को बचाने की लिए मुख्यमंत्री को अवगत कराया था। नहर विभाग के सहायक अभियंता वसीम राजा ने बताया कि सरकार के आदेश पर कालपी के चंदेलकालीन दुर्ग का सर्वेक्षण कर लिया गया है। यमुना नदी के कटाव से बचाने के लिए विभाग के द्वारा कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। इसके साथ ही इससे जुड़े रानी लक्ष्मीबाई पार्क का भी सुंदरीकरण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसमें 10 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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