छठ में व्रत के लिए पकवान बनातीं महिलाएं
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उरई। चार दिवसीय छठ पूजा को लेकर बिहारी समाज में विशेष उत्साह है। शुक्रवार को छठ पूजा के दूसरे दिन गुड़ की खीर व सात रोटी के साथ प्रसाद के रुप में ग्रहण कर महिलाओं ने खरना व्रत शुरू किया। इसके बाद 36 घंटे तक निर्जला व्रत किया जाता है। यह व्रत तभी टूटता है, जब चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दे दिया जाता है। इस दौरान महिलाओं ने छठ पूजा संबंधी गीत सुन ली अरजिया हमार हे छठी मैया, केरवा जे फरेला धवद हे, व बेदियां बना लीं सूर्य देव के घाट पर सूरज देव के नाम जैसे गीत गाए।
छठ पूजा के पहले दिन नहाय खाय के बाद दूसरे दिन शुक्रवार को महिलाओं ने खरना व्रत किया। जिसमें अपने अपने घरों में गुड़ की खीर व सात रोटी बनाई और उसे खाकर व्रत शुरू किया। बिहारी छठ पूजा समिति के अध्यक्ष व शिक्षाविद संजय साहनी ने बताया कि चार दिवसीय व्रत को पूरी श्रद्धा व विश्वास के साथ करते है। उन्होंने बताया कि पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने से शरीर को कई फायदे होते है। सूर्य की किरणों से ऐसे कई तत्व मिलते है, जो सेहत के लिए लाभदायक है।
सूर्य को अर्घ्य देने के क्रम में सूर्य की किरणें परिवर्तित होकर आंखों में पड़ती है। जिससे स्नायुतंत्र सक्रिय हो जाता है और व्यक्ति खुद को ऊर्जावान महसूस करता है। सुमन साहनी बताती है कि सूर्य साक्षात ईश्वर है। इस पूजा में लगने वाली सामग्री जैसे हल्दी, मूली, अदरक, नीबू आदि बताती है कि स्वस्थ रहने के लिए इनका उपयोग कैसे करें। इस दौरान संजीव, अमन, हर्षिता, रामाशीष, वासमती, डा. संजय सिंह, आराधना, मीना, तारकेश्वर त्रिपाठी, वसंत मिश्रा, दीनानाथ, ओपी श्रीवास्तव, शैलेंद्र पाठक, धनंजय, सुधा, मुकेश, सुधाकर, कृष्णकांत, बिहारीलाल आदि बिहारी एवं पूर्वांचल के लोग छठ व्रत को पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाने की तैयारियों में जुटे हुए हैं।