उरई। साहित्यिक संस्था पहचान की ओर से न्यू लाइफ पब्लिक स्कूल में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य समारोह में कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब आनंदित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ में सरस्वती वंदना सुरेश चंद्र त्रिपाठी ने की। संस्थापक विनोद गौतम ने कवियों, शायरों तथा श्रोताओं की कवि गोष्ठियों पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार यज्ञदत्त त्रिपाठी ने कहा कि हम जात पात के घेरे में न घेरें स्वयं को औरों को, सब धर्मों का सम्मान करें पूजे पूजा के ठौरों को। प्रेमनारायण ने -सूरज का रथ अभिनव पथ पर बढ़ता जाता है। फरीद बशर ने पढ़ा- सबक लो दुश्मन-ए- इंसानियत जरा उससे, वो जिसने राम को पाया मरा मरा कह के। बुंदेली कवि डालचंद्र अनुरागी ने सुनाया- मैं गीत हूं इक गजल की तरह। जनाब असरार मुकरी ने पढ़ा- पहले तो उनके मामू का करते रहे लिहाज, फिर अपना पैंतरा भी बदलना पड़ा मुझे। गीतकार कवि विनोद गौतम ने सुनाया आ गईं फिर निठुर सर्दियां, फिर सताने लगे जिस्मों जां एहै वही रेशमी सी छुअन धूप है या तेरी उंगलियां। प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम ने सुनाया- मुहब्बत से मिले सबसे मुहब्बत की नजर रखो, करे यादों से जो घायल अरे ऐसा हुनर रखो। शफीकुर्रहमान ने पढ़ा-अपने मिटने का हमें हम नहीं, मिट जाएंगे, अपना मिटता हुआ किरदार बचाने के लिए। वीरेंद्र तिवारी ने पढ़ा-पहली रोटी गाय की गाय को खिलाएंगे। इस दौरान रविशंकर मिश्रा, विमला तिवारी, राघवेंद्र, परवेज अख्तर, इमरान भारती ने भी अपनी रचनाएं सुनाकर वाहवाही लूटी। संचालन कृपाराम कृपालु ने किया। आभार अशोक होतवानी ने व्यक्त किया।