उरई। माहे मोहर्रम के अवसर पर शनिवार शाम करसान सड़क स्थित अतीक खान के आवास पर शहादतनामा (नातिया मुशायरा) का आयोजन किया गया। इसमें जिले और आसपास के प्रसिद्ध शायरों ने इमाम-ए-हुसैन की याद में कर्बला की शहादत पर आधारित कलाम पेश किए। कार्यक्रम देर रात तक चला।
मुशायरे की सदारत उस्ताद शायर अब्दुल मालिक अब्बासी साकी ने की। निजामत की जिम्मेदारी कालपी से आए शायर निजाम हुसैन फिदा ने संभाली। शायरों ने अपने अशआर के माध्यम से इमाम हुसैन और कर्बला के संदेश को प्रस्तुत किया। अब्दुल मालिक अब्बासी ने पढ़ा, शब्बीर ने घर अपना लुटाकर दिखा दिया, इस्लाम का जहां में मुकद्दर जगा दिया। निजाम हुसैन फिदा ने कहा, किसको है इख्तिलाफ बता इस सवाल से, शान-ए-अरब है सुर्खरू ज़हरा के लाल से। शायरों ने मनकबत और सलाम के माध्यम से इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद किया। उनके कलाम में कर्बला की शहादत का मार्मिक चित्रण था। हसीब अंसारी, शकील चिश्ती, अब्दुल सलाम राही, शमीम अशरफ, असरार अहमद मुकरी सहित अन्य शायरों ने भी अपने कलाम पेश किए।