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झूलेलाल जयंती पर लंगर, भजन-कीर्तन

Fri, 08 Apr 2016 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
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झूलेलाल की प्रत‌िमा को माला पहनाते भक्त - फोटो : अमर उजाला
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सिंधी समाज के आराध्य देव झूलेलाल का जन्मोत्सव शुक्रवार को शहर में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। स्टेशन रोड स्थित सिंधी गुरुद्वारे में भक्तों ने लंगर छका। यहीं पर स्थित मंदिर में भजन कीर्तन का आयोजन भी किया गया।  शुक्रवार को झूलेलाल जयंती पर सबसे पहले भक्तों ने स्टेशन रोड स्थित झूलेलाल की
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प्रतिमा को दुग्ध स्नान कराया।  मंदिर में आचार्यों की ओर से हवन पूजन कराया गया। इसकेे बाद सुबह 11 बजे स्टेशन रोड स्थित सिंधी गुरुद्वारा में झूलेलाल को भोग लगाया गया। इसके बाद भक्तों ने लंगर छका। इस दौरान बताया गया कि झूलेलाल का जन्म उस समय हुआ, जब दुष्ट शासक मिरखा शाह हिंदू प्रजा पर अत्याचार कर रहा था। नरसपुर नगर में रतन

राय के घर एक तेजस्वी बालक का जन्म हुआ। बालक का नाम उदयचंद्र रखा गया। इसके बाद उन्हेें उडे़ेरोलाल, झूलेलाल, अमर लाल, लाल साई, दरिया शाह, जल, ज्योति, वरुण देव आदि नामों से पुकारा जाने लगा। धीरे-धीरे बालक झूले लाल जवान हो गया व उनकी ख्याति पूरे देश में फैलने लगी। झूलेलाल एक दिन अकेले मिरखाशाह के दरबार में पहुंचे और उसे
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हिंदू प्रजा पर अत्याचार न करने व उनका धर्म परिवर्तन न कराने को समझाने लगे। मिरखाशाह ने उनकी बात नहीं मानी। उसने अपने अनुचरों को आदेश दिया कि वे झूलेलाल को बंदी बना लें। जब सैनिक झूलेलाल को बंदी बनाने के लिए बढे़, तभी समुद्र में बवंडर उठना शुरू हो गया और सैनिक उसमें डूबने लगे। ये देख मिरखा शाह ने उनसे माफी मांगी और उनका

अनुयायी बन गया। शाम 5 बजे स्टेशन रोड स्थित झूलेलाल मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई, जो नगर भ्रमण करती हुई माहिल तालाब पहुंची, जहां सैकड़ों श्रद्धालुओं ने ज्योति विसर्जन

किया। इस मौके पर लक्ष्मण दास बबानी, अशोक होतवानी, ऊधामल, घनश्यामदास, बग्गामल लालवानी, श्यामलाल, कपिल आहूजा, वासुदेव बाबानी, शैलेंद्र, कमल रामदेव, आज्ञासिंह, शंकर लाल माखीजा आदि मौजूद रहे।
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