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जेडीसी बैंक सभापतियों के अधिकार मिले वापस, फिर बने समिति के अध्यक्ष

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उरई। आरएसएस के सहकारिता से जुड़े संगठन सहकार भारतीय की पहल व जेडीसी अध्यक्षों (सभापति) की इस्तीफे की धमकी के बाद सरकार बैंक फुट पर आई और अध्यक्षों के छीने गए सभी अधिकारों को बिना शर्त वापस कर दिया है। इससे कार्यकर्ता व समितियों के अध्यक्षों में उत्साह की लहर है। अध्यक्षों (सभापति) ने इस जीत को लोकतंत्र की जीत बताया है।
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बता दें कि शासन ने 29 जून को एक शासनादेश के माध्यम से सभी जेडीसी बैंकों के न सिर्फ वित्तीय अधिकारी छीन लिए थे, बल्कि उन्हें प्रशासनिक कमेटी से ही बाहर कर दिया था। जिससे अध्यक्षों का बैंकों से हस्तक्षेप पूर्णता खत्म हो गया था। जिसको लेकर अध्यक्षों व सहकार भारती के पदाधिकारियों में रोष व्याप्त था। मामले को लेकर सहकार भारतीय व अध्यक्षों ने सरकार को कई ज्ञापन भेजे, करीब दो महीने की लड़ाई के बाद सरकार ने पुन: जेडीसी बैंकों के अध्यक्षों को सारे अधिकार वापस करते हुए उन्हें प्रशासनिक कमेटी का वापस अध्यक्ष बनाया है।
मामले को लेकर सहकार भारती प्रदेश महामंत्री डा. प्रवीण सिंह जादौन ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सहकारी समिति अधिनियम 1965 की धारा 122 के अधीन उत्तर प्रदेश प्रारंभिक कृषि सहकारी ऋण समिति नियमावली 1976 को संशोधित कर जिले में एक जिला प्रशासनिक कमेटी बना दी थी, जिसका अध्यक्ष सहकारिता के जिले के अधिकारी को बना दिया था। उस समिति ने बैंक के सभापति को बाहर कर दिया गया था। इन आदेश के बाद से ही सहकार भारती उत्तर प्रदेश के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा से मिलकर इस आदेश को वापस लेने के लिए आग्रह किया था। इसके साथ ही संगठन ने मुख्यमंत्री को भी कई ज्ञापन भेजे थे। जिसे संज्ञान में लेकर सरकार ने पुन: बैंकों के अध्यक्षों को प्रशासनिक कमेटी का अध्यक्ष को बना दिया है, जिले के सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता इसके सदस्य सचिव होंगे। पांच सदस्यीय कमेटी में अपर जिला सहकारी अधिकारी, जिला लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां एवम् जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक इसके सदस्य बनाए गए हैम। अधिकार वापस मिलने से सहकारी समितियों के अध्यक्षों में उत्साह है।
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