उरई। रमजान के महीने में जालौन की सूतफेनी ने जहानाबाद की सूतफेनी का दबदबा खत्म कर दिया है। अब बुंदेलखंड के अधिकतर जिलों में यहां की बनी सूतफेनी जा रही है। पहले जालौन में भी जहानाबाद से सूतफेनी मंगाई जाती थी लेकिन त्योहार के समय अक्सर कम पड़ जाती थी। इसके बाद यहां के व्यापारियों ने जहानाबाद से कारीगर बुलाकर यहां पर बनवाना शुरू किया। इसके बाद जालौन की सूतफेनी दूसरे जिलों में भी जाने लगी।
ईद से पहले ही रमजान महीने में सूतफेनी की मांग बढ़ जाती है। सूतफेनी का उपयोग सहरी में के साथ ही ईद के दिन भी हर घर में होता है। दस साल पहले तक सूतफेनी जहानाबाद से मंगाई जाती थी। अब उरई के व्यापारियों ने जहानाबाद के कारीगरों को बुलाकर यहीं पर सूतफेनी बनवाना शुरू कर दिया। इससे लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। व्यापारी रशीद बताते हैं पहले थोक में जनाहाबाद से सूतफेनी मंगवाते थे, ईद आने तक वह भी कम पड़ जाती थी। राशिद ने बताया कि इस साल भी जहानाबाद से चार कारीगर बुलाए हैं। हर साल जरूरत के हिसाब से कारीगर बुलाए जाते हैं।
राशिद ने बताया 110 से 120 रुपये तक बाजार का भाव है। दस प्रतिशत तक महंगाई बढ़ी है। तेल, मैदा, जलाऊ लकड़ी के साथ अन्य चीजों के भाव भी बढ़े हैं, जिससे इस साल सूतफेनी के रेट भी चढ़े हुए हैं। कारीगरों से लेकर बाजार तक पहुंचने में हर चीज के रेट जुड़ते जाते है। महंगाई होना आम बात है अगर अन्य चीजें सस्ती मिले तो सूतफेनी भी सस्ती होगी। राशिद ने बताया कि ग्राहकों की मांग पर दो प्रकार की सूतफेनी बनाई जा रही है।