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जालौन: होटल में खाना परोस रहा वेटर बना सिपाही, रिजल्ट देख चौंके पवन राजावत, पूरी की ड्यूटी…फिर छोड़ी नौकरी

Thu, 15 Oct 2026 03:22 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन

सार

Jalaun News: एक होटल में वेटर की नौकरी कर रहे मैनपुरी के पवन राजावत की मेहनत आखिरकार रंग लाई। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती का रिजल्ट ऑनलाइन चेक करने पर पवन का चयन सिपाही के पद पर हो गया।

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पवन राजावत - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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जालौन जिले में होटल में लोगों को खाना परोसते-परोसते अचानक ऑनलाइन रिजल्ट देखा, तो किस्मत नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत रंग लाई थी। जिस हाथ से पवन राजावत अब तक होटल में लोगों को खाना परोस रहे थे। उसी पवन का उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर चयन हो गया। खास बात इसमें यह रही की सिलेक्शन के बाद भी उसने पूरे दिन और रात तक ड्यूटी की। इसके बाद हिसाब किया, दूसरे दिन नौकरी छोड़ी।

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पवन राजावत मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के रहने वाले हैं। उन्होंने मैनपुरी से दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद स्नातक की शिक्षा हासिल की। वह आगे की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कानपुर में रह रहे थे। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती की परीक्षा में शामिल होने के बाद वह अपने अगले परिणाम का इंतजर कर रहे थे। इसी बीच, जब परीक्षा से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पूरी हो गई और फाइनल रिजल्ट का इंतजार था।

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वेटर के तौर पर कर रहे थे काम

उन्होंने खाली बैठने के बजाय काम करने का फैसला किया। पिछले करीब दो महीने से पवन उरई के सूर्य होटल में वेटर के तौर पर काम कर रहे थे। उनका रोज का काम था, होटल में आने वाले लोगों को खाना परोसना, ग्राहकों की जरूरतों का ध्यान रखना और अपनी ड्यूटी पूरी करना। उन्होंने बताया कि बुधवार को भी वह सभी खाना खिला रहे थे। रिजल्ट आने के एक घंटे बाद उन्होंने साइट खोली और देखा कि उनका भी नाम उसने आ गया। उन्हें पहले यकीन नहीं हुआ।

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अपने काम को छोटा नहीं समझा
फिर उन्होंने दूसरे दोस्तों से चेक करवाया, तब जाकर उन्हें पता चला कि  उसका उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर चयन हो गया है। बताया कि चयन की जानकारी मिलने के बाद भी होटल में अपनी ड्यूटी पूरी की और लोगों को खाना परोसते रहे। यही बात उनकी कहानी को और खास बनाती है। नौकरी का रिजल्ट आने की खुशी अपनी जगह थी, लेकिन उन्होंने अपने काम को छोटा नहीं समझा और न ही जिम्मेदारी से पीछे हटे। उनके लिए काम सिर्फ आमदनी का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की कोशिश का हिस्सा भी था।

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