उरई। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सभी एहतियात बरते जा रहे हैं, वहीं वातावरण में बढ़ता प्रदूषण इस संक्रमण को और बढ़ा रहा है। पर्यावरण को साफ स्वच्छ रखने के उद्देश्य से आज वायु प्रदूषण सप्ताह के अंतर्गत अपर निदेशक डा. वीके सिन्हा की अध्यक्षता में मंडल स्तरीय वेबिनार का आयोजन किया गया।
अपर निदेशक ने कहा कि हम भोजन के बिना तो कुछ दिन जीवित रह सकते हैं लेकिन वायु के बिना बिलकुल नहीं रह सकते है। वायु प्रदूषण से टीबी, अस्थमा और कैंसर जैसी बीमारी हो सकती है। उन्होंने बताया राष्ट्रीय बाल स्वास्थ कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम स्कूल खुलने के बाद सभी बच्चों का कोविड टेस्ट करने के साथ ही वायु प्रदूषण के प्रभाव और उसे रोकने के तरीके के बारे में बताएगी। संयुक्त निदेशक डॉ रेखारानी ने कहा कि वायु प्रदूषण के प्रभाव से शिशु एवं मातृ स्वास्थ्य को बचाना है। बचपन से शुरू करे तो वायु प्रदूषण का खतरा सबसे अधिक गर्भस्थ शिशु और मां पर पड़ता है। सिफ्सा एनएचएम के मंडलीय परियोजना प्रबंधक आनंद चौबे ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से वायु प्रदूषण के प्रभावों और इसको कैसे रोक सकते है, इसके बारें में बताया। यह सप्ताह 12 सितंबर तक मनाया जाएगा। वेबिनार में मंडलीय क्वालिटी सलाहकार डॉ राजेश पटेल के अलावा जिलों के नोडल अधिकारी, डीसीपीएम, एचईआईओ, बीसीपीएम, चिकित्सा अधिकारी शामिल रहे।