सूखे बुंदेलखंड में तंगहाल किसान व मजदूरों पर महंगाई भी कहर ढा रही है। घर की रसोई का बजट दाल, सब्जी की बढ़ी हुई कीमतों नेे बिगाड़ दिया। इसका असर थाली में भी देखने को मिल रहा है। उड़द की दाल तो थाली से गायब ही हो गई है। टमाटर का रंग भी बढ़ी हुई कीमतों से फीका नजर आने लगा है। आलू कई वैरायटी में उपलब्ध है तो उसके रेट भी अलग है।
सबसे कम कीमत का आलू भी 20 रुपये में मिल रहा है। ऐसी स्थिति में किसान परेशान है। अच्छे दिन कब आएंगे यह किसानों को समझ नहीं आ रहा है। एक तो प्रकृति साथ नहीं दे रही ऊपर से महंगाई डायन बनकर सामने खड़ी हुई है। जिले में बीते 15 दिनों में जिस तरीके से सब्जी और दालों की कीमतों में उछाल आया है उससे किसान खासे परेशान है। एक तो सूखा के
चलते फसलें नष्ट हो गई ऊपर से महंगाई ने रही सही कसर पूरी कर दी है। 15 दिन पूर्व टमाटर 25 से 30 रुपये किलो बिक रहा था जो अब 40 रुपये किलो हो गया है। टमाटर की कीमतों ने सब्जियों का स्वाद फीका कर दिया है। टमाटर की चटनी भी थाली से गायब हो गई है। टमाटर ही नहीं कद्दू, आलू, शिमला मिर्च, बंद गोभी, कटहल, करेला समेत अन्य सब्जी के रेटों में
भी बढ़ोत्तरी हो गई है। इससे रसोई का पूरा बजट ही गड़बड़ा गया है। 100 रुपये में अब एक छोटा थैला भी नहीं भर रहा है। किसान ही नहीं मजदूर और आम आदमी भी मंहगाई के दंश से बुरी तरह आहत है। 15 दिन में जिस तरीके से सब्जियां 5 से 10 रुपये किलो तक मंहगी हुई है उससे समझ नहीं आ रहा कि अच्छे दिन कब आएंगे।