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प्रशासन के वादे व प्रयास बेअसर, अन्ना मवेशी हावी

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खेत में खड़े अन्ना जानवर। - फोटो : ORAI
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उरई। जिला प्रशासन की तमाम तैयारियां व वादों के बीच अभी भी जिले के किसान अन्ना समस्या से जूझ रहे है। हालात यह हैं कि आए दिन अन्ना किसी न किसी क्षेत्र के किसान के खेतों में घुस कर फसलों को चौपट कर रहे है और वहीं अधिकारी जल्द ही समस्या से निस्तारण की बात कर रहे है। इसके साथ ही शासन के निर्देश के बाद भी अन्ना शहर व हाइवे की सड़कों में डेरा जमाए हैं। वहीं अन्ना से मुक्ति के लिए जिले में सैकड़ों गो आश्रयगृह खोले गए है, जिनमें अव्यवस्थाओं का अंबार लगा है।
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माधौगढ़ प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र में अन्ना समस्या को लेकर अधिकारी कई बैठके कर चुके हैं। बैठकों में अन्ना मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए तमाम तरह के वादे व योजनाएं बताई जाती हैं, लेकिन अभी भी धरातल पर स्थिति जस की तस बनी है। क्षेत्र के गोहन, सरावन, माधौगढ़, ऊमरी, बंगरा आदि में अन्ना जानवरों को लेकर किसान दिन रात खेतों की रखवाली करने को मजबूर है, लेकिन फिर भी नजर चूकते ही अन्ना फसलों को नष्ट कर देते हैं। हालात ये है कि किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें हैं। अधिकारी सिर्फ बैठक कर खानापूर्ति कर रहे हैं और किसान अन्ना मवेशियों से बुरी तरह परेशान है। किसान देवधर, महेंद्र, विनीत आदि का कहना है कि प्रशासन अन्ना मवेशियों के नाम पर सिर्फ कागजों में ही पसीना बहा रहा है, धरातल पर किसान अन्ना से बुरी तरह परेशान है।
आटा कस्बे में अस्थायी गोशाला होने के बावजूद किसानों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। बता दें कि आटा अकौड़ी मार्ग पर स्थित अस्थायी गोशाला में सिर्फ 20 से 25 अन्ना जानवर कभी कभार बंद किए जाते हैं और अभी तक आटा अस्थायी गौशाला का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। कस्बा आटा के किसानों का कहना है कि अगर अभी अन्ना जानवरों को आटा गोशाला में बंद नहीं किया गया तो आने वाली फसलों में अन्ना जानवर नुकसान पहुंचाएंगे। आटा में करीब 500 से अधिक अन्ना जानवर हैं और आए दिन अन्ना जानवरों की किसानों की फसल नष्ट कर रहे हैं।
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कदौरा प्रतिनिधि के अनुसार, जिला प्रशासन ने अभी हाल ही में सड़कों पर बैठे अन्ना को लेकर सख्त निर्देश दिए थे। निर्देश के बाद जिले का दौरा करने आई प्रभारी मंत्री नीलिमा कटियार ने भी अन्ना को लेकर सख्त निर्देश दिए थे कि अगर सड़कों पर अन्ना दिखे तो आधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। निर्देश के बाद एक सप्ताह तक तो हाईवे पर अधिकारी दिखे और अन्ना को लेकर ठोस कदम उठाए। कई मुख्य मार्गों को चिह्नित किया गया, प्वाइंट भी बनाए गए, लेकिन यह व्यवस्था सिर्फ कुछ दिनों के लिए ही रही। समय बीतने के बाद ही सारे नियम व कानून कागजों तक सिमट गए और एक बार फिर अन्ना शहर की सड़कों पर डेरा जमाए नजर आने लगे।
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