जालौन स्थित वृद्धा आश्रम में भोजन करते वृद्धजन।
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उरई। जिले में वृद्धा आश्रम संचालित करने के लिए केंद्र सरकार ने एनजीओ से ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। इस पर जिले से 14 आश्रम संचालित होना बताया गया। एसडीएम सदर की अगुवाई में जांच टीम ने पाया कि जिले में एक ही आश्रम संचालित किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट उन्होंने शासन को सौंपी है। कुछ ही समय में इनका अनुदान आने वाला था। अब इनके निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। शिकायत होने पर डीएम ने दोबारा से इसकी जांच करने के आदेश दिए हैं।
केंद्र सरकार ने जिले में पच्चीस व पचास वृद्धों की क्षमता वाले वृद्धा आश्रम संचालित करने के लिए एनजीओ से आवेदन मांगे थे। इस पर जिले से भेजे गए आवेदनों में बताया गया कि 14 जगहों पर आश्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके लिए एसडीएम सदर नेहा ब्याडबाल की अगुवाई में दो सदस्यीय टीम ने सभी आश्रमों की हकीकत जानी तो पता चला कि जिस जगह पर वृद्धा आश्रम होना दर्शाया गया है। वहां पर कोई रहता ही नहीं है।
इसके साथ ही कई जगहों पर स्कूल व अन्य जगहों पर आश्रमों के होने की बात कही जा रही थी। टीम को जांच में केवल जालौन-औरैया रोड पर एक ही जगह आश्रम संचालित मिला। इसमें करीब 36 वृद्धजन निवास कर रहे थे। उन्होंने इसकी जांच शासन को भेज दी है। शिकायत किये जाने पर दोबारा इनकी जांच की जा रही है।
कालपी व उरई में नहीं मिला कोई भी वृद्धाश्रम संचालित
उरई। शासन द्वारा मांगे गए आवेदनों में कालपी में तीन व उरई में दो जगहों पर वृद्धाश्रम होना बताया गया था। जब टीम ने जांच की तो पता चला कि कालपी व उरई में एक भी जगह आश्रम संचालित नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही मोबाइल नंबर भी आवेदनों में नहीं डाले गए थे। जिस जगह पर आश्रम संचालित होने की बात कही जा रही थी। उस जगह पर दूर दूर तक कोई आश्रम नहीं था। टीम ने इसकी जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
वर्जन
वृद्धाश्रमों की जांच की गई थी। जांच में जालौन में सिर्फ एक आश्रम संचालित होना पाया गया है। इसके अलावा कहीं वृद्धाश्रम संचालित होते नहीं पाए गए। दोबारा से एक बार और जांच करवाई जा रही है। -नेहा ब्याडबाल, एसडीएम