फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जालौन में पति से छिना रोजगार तो पत्नियों ने उठाया गृहस्थी का भार

विज्ञापन
अनीशा अपने बच्चों के साथ - फोटो : ORAI
विज्ञापन
आटा/कदौरा (जालौन)। कहावत है कि पति-पत्नी गृहस्थी की गाड़ी के वे पहिये हैं, जिनके बल पूरा जीवन चलता है। कोरोना काल में महिलाओं ने इसे साबित भी कर दिखाया कि यदि पति के पास रोजगार न हो तो वह गृहस्थी की गाड़ी चला सकती हैं। लॉकडाउन ने हजारों लोगों का रोजगार छीन लिया। किसी का कारोबार ठप हो गया तो किसी की नौकरी चली गई। ऐसे में परिवार पालने के लिए महिलाओं ने मैदान संभाल लिया। कोई चूड़ी बेचकर तो कोई किराने की छोटी से दुकान से गृहस्थी चला रही है। महिलाओं का कहना है कि आज नहीं तो कल हालात सुधरेंगे, तब तक परिवार को भूखा नहीं रखा जा सकता है। घर के काम और रोजगार चलाना थोड़ा कठिन तो जरूर है लेकिन हम इसे कर लेंगे। प्रस्तुत है कुछ ऐसी महिलाओं की आत्मनिर्भरता की कहानी।
विज्ञापन

टेंट हाउस खत्म हुआ तो खोली चूड़ी की दुकान
आटा कस्बे की नईमा बताती हैं कि कोरोना से पहले उनके पति इसरायल का छोटा सा टेंट हाउस था। इसकी आमदनी से पांच बच्चों वाले परिवार की गुजर बसर हो जाती थी। मार्च में लॉकडाउन लगा तो मानो परिवार की खुशियों पर ग्रहण लग गया। अनलॉक के बाद भी टेंट हाउस का काम रफ्तार नहीं पकड़ा। जमा पूंजी भी खर्च हो गई। इस मुश्किल से निपटने के लिए इधर-उधर से 15 से 20 हजार रुपये का इंतजाम किया और स्टैंड पर ही चूड़ी की दुकान खोल ली। फिलहाल तीन-चार सौ रुपये रोज हाथ आ जाते हैं। शनिवार को भी बाजार खुलने से कुछ राहत हुई है। कस्बे की शबनम बताती है कि पति इस्लाम भोगनीपुर भट्ठे पर मजदूरी करते थे। लॉकडाउन के बाद घर आ गए और बेरोजगार हैं। वह भी चूड़ी की छोटी सी दुकान कर परिवार पाल रही हैं।
छूटा पानी पूरी का धंधा, थामा तसला-फावड़ा
आटा के ही भबुआ गांव निवासी गुड्डी देवी बताती हैं कि वे पति सोबरन के साथ मिलकर बिहार में पानी-पूरी बेचने का काम करती थीं। कोरोना का संक्रमण फैला तो काम-धंधा बंद हो गया। किसी तरह इंतजाम कर जैसे-तैसे अपने घर तो आ गए, लेकिन यहां पर हाथ पर हाथ धरे बैठने के अलावा कुछ नहीं बचा था। लिहाजा एक बार फिर घर की चौखट लांघकर काम करने का फैसला किया और मजदूरी के लिए निकल पड़ी। बकौल गुड्डी फिलहाल वह मकान निर्माण के काम में फावड़े से मसाला डालने का काम कर रही है। इससे वह परिवार का गुजर-बसर कर रही है।
विज्ञापन

परिवार पालने को घरों से निकली जमीला, अनीसा
कदौरा कस्बे की अनीसा खातून ने बताया कि पति मछलियां पकड़ते थे। लॉकडाउन में ऐसा काम बंद हुआ कि दोबारा चालू होना भी मुश्किल लगने लगा था। पति पत्नी ने ठाना कि 6 बच्चों का पेट पालने के लिए उन दोनों को ही घर से निकलना होगा। फिलहाल वे दोनों मिलकर ईंट गारे का काम कर रहे हैं। इससे 600-700 रुपये मिल जाते हैं। किसी तरह गृहस्थी की गाड़ी चल रही है। कस्बे की ही जमीला बताती हैं कि पति इस्लाम कोरोना से पहले खुद के हाथ ठेला पर माल ढुलाई करते थे। लॉकडाउन में ठेला खड़ा हुआ तो आमदनी बंद हो गई। लिहाजा घर चलाने के लिए पति-पत्नी घर पर ही समोसा बनाने लगे। वह समोसे बनाती है और पति साइकिल से फेरी लगाकर बेचते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें