कोंच। तेलुगु एवं हिंदी फिल्मों के अभिनेता आदित्य ओम ने कहा कि कला तपस्या के समान है जिससे खुद को आत्मिक संतुष्टि मिलती है, जबकि फिल्म और सिनेमा हमें संतुष्टि से दूर ग्लैमर, शोहरत और पैसे की ओर खींचता है। फिल्म इंडस्ट्री एक ऐसा क्षेत्र है जहां रोज कुआं खोदकर पानी पीना पड़ता है। सिनेमा में सरकारी नौकरी की तरह कोई बंधी हुई आय का स्त्रोत नहीं होता है, खुद का जितना टेलेंट होता है उतना ही उसमें हासिल कर पाते हैं।
अमरचंद्र महेश्वरी इंटर कॉलेज में सितारों से संवाद कार्यक्रम में अलिफ, मास्साब जैसी फिल्मों के निर्माता आदित्य ओम ने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी मुंबई की चकाचौंध से प्रभावित होकर उधर का रुख कर रही है, जबकि स्थानीय स्तर पर सिनेमा संस्कृति को विकसित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वे कभी भी अपने आपसे झूठ न बोलें, अपनी क्षमताओं का आकलन कर ही लक्ष्य निर्धारित करें।
प्रतिदिन नया सीखने की कोशिश करें। सिनेमेटोग्राफर मधुसूदन कोटा, चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल के संस्थापक शाह आलम, डॉ. चक्रवर्ती, रैड लैंड जैसी फिल्मों के अभिनेता अनिरुद्ध सिंह और अभिनेत्री सिमरन कौर ने अनुभव साझा कर रंगकर्मियों को टिप्स दिए। कार्यक्रम को कुलदीप बौद्ध, आंध्रा बैंक लखनऊ के जोनल मैनेजर अभिषेक द्विवेदी, अमजद आलम, मोहम्मद नईम ने भी संबोधित किया।
रंगकर्मियों ने लाला हरदौल नाटक का भी मंचन किया। इस दौरान अनिल वैद, साहना खान, रानी कुशवाहा, आस्था वाजपेयी, कोमल अहिरवार, पूजा पटेल, तान्या, अंकुल राठौर, आदर्श, प्रिंसी, समर्थ बाजपेयी, हनी अग्रवाल, अमन, राज शर्मा, सैंकी यादव, रामजी अग्रवाल, राज खरे, अंकिता, अंशिका, प्रिंसी, रिया, प्रिया बाथम, कोमल, पारसमणि,संस्कृति गिरवासिया, रंजीत कुशवाहा, बलराम सिंह, सुधीर द्विवेदी, आदित्य वैद, मुईद अहमद आदि मौजूद रहे।
अभिनेत्री सिमरन कौर को स्मृति चिन्ह प्रदान करते संस्कृति गरासिया- फोटो : ORAI