नोटबंदी के बाद शुरू हुई कैश की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। गांवों में स्थापित बैंकों से पैसा न मिलने से लोगों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। सोमवार को कैश की समस्या को लेकर डकोर क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों के खाताधारकों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मेन रोड पर जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने जाम भी लगा दिया। सूचना पाकर डायल
100 की गाड़ी मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाकर जाम खुलवाया। बैंक कर्मचारियों पर भी आरोप मढे़। खाताधारकों का कहना है कि जब भी कैश आता हैं तो बैंक कर्मी चहेतों को पहले बांट देते हैं। इससे जरूरतमंद ताकते रह जाते हैं। कहा कि बैंक कर्मचारियों की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नोटबंदी को 41 दिन हो चुके हैं। बावजूद इसके ग्रामीण इलाकों में
स्थित बैंकों के हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो मांग के अनुसार कैश नहीं मिल रहा है। इससे सभी खाताधारकों को पैसा नहीं मिल पाता। जिस दिन कैश आता है उस दिन भी 2000 रुपये खाताधारकों को नहीं मिल पाते। तीन दिन से कैश न मिलने से खफा डकोर क्षेत्र के बंधौली, गुढ़ा, सिमिरिया, ऐरी रमपुरा, मुहम्मदाबाद, कुसमिलिया
समेत आधा दर्जन गांवों के खाताधारकों ने सोमवार को सड़क पर उतरकर नारेबाजी कर प्रदर्शन कर जाम लगा दिया। खाताधारक ब्रजेंद्र सिंह परिहार, रामनारायन सिंह, मैयादीन, श्रीपत यादव, शांति देवी, दशरथ सिमिरिया का आरोप है कि उन्हें तीन दिन से बैंक से एक फूटी कौड़ी तक नहीं मिली है जबकि बैंक में कैश बराबर आ रहा है। बैंक कर्मी खाताधारकों को
दरकिनार करके चहेतों को कैश दे रहे हैं। इसके बदले में उन्हें सुविधा शुल्क भी मिल रहा है। कहा कि बैंक कर्मचारियों की हठधर्मिता को किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हर हाल
में इस व्यवस्था को देखते हुए आलाधिकारी उचित कदम उठाएं। अगर कैश नहीं आ रहा हैं तो उसे बैंक में भेजा जाए ताकि खातेधारकों को पर्याप्त मात्रा में पैसा मिल सके। उधर जाम की सूचना पर डायल100 पुलिस मौके पर पहुंची और जाम खुलवाया।