पानी की एक बूंद के लिए सुबह से शाम तक जूझना माधौगढ़ ब्लाक के गीधन की
खोड़ गांव में रहने वालों की मजबूरी बन गया है। हालात यह हैं कि गांव में
हर कोई पानी को लेकर परेशान है। एक हैंडपंप को छोड़ दिया जाए तो शेष सभी
हैंडपंप खारा पानी देते हैं तो कुछ बंद हैं। खारे पानी को इंसान तो छोड़िए
जानवर भी पीना पसंद नहीं करते। इस पानी को पीने
से गांव के बच्चों के दांत
पीले हो जाते हैं और शरीर पर खुजली होने लगती है। ऐसा भी नहीं है कि सालों
से पानी की दिक्कत झेल रहे ग्रामीणों ने कहीं गुहार न लगाई हो। सांसद से
लेकर विधायक और आला अफसर से लेकर बाबू तक सभी की मेजों पर समस्या पहुंची
लेकिन समाधान कोई नहीं करा सका। प्रयोगशाला की रिपोर्ट है कि पानी पीने
योग्य नहीं है।
अब पानी को उबाल कर ही इस्तेमाल में लिया जा रहा है। गीधन
की खोड़ गांव में सालों से खारा पानी समस्या बना हुआ है। गर्मी के मौसम
में तो समस्या और भी गंभीर हो जाती है। भीषण गर्मी में तो ग्रामीणों को
खारा पानी भी नसीब नहीं होता है। लगभग सभी हैंडपंप और और कुएं पूरी तरह सूख
जाते हैं। ऐसे में आसपास के गांवों से पानी लाया जाता है।
महिलाएं घर में
पानी को स्वच्छ बनाने के लिए पूरे दिन प्रयास करती हैं। बच्चे और बूढ़े सभी
को भोर होते ही पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। घंटों लाइन में लगने के
बाद एक बाल्टी पानी बमुश्किल ले पाते हैं। बीहड़ का गांव होने से नेता
सिर्फ वोट मांगने और अधिकारी केवल खानापूरी करने ही आते हैं। जब कभी उन्हें
ग्रामीणों ने घेरा तो समस्याओं का कागज
थाम लिया और आश्वासन का झुनझुना
थमा कर लौट जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खारा पानी जानवर तक नहीं
पीते हैं। ग्रामीण चिंतामन, रामकुंअर, रामअवतार, भारत सिंह का कहना है कि
कई मर्तबा जमीन में बोरिंग भी कराई गई, लेकिन साफ पानी नहीं मिल सका। इससे
साफ है कि जमीन के भीतर पानी में ही कुछ गड़बड़ी है।
वर्जन
मेरे
सामने कभी भी गांव की पानी की कोई समस्या नहीं आई है। ऐसी कोई समस्या है
तो वह पेयजल की संचालित योजनाओं से पाइप लाइन व्यवस्था के लिए प्रस्ताव
करेंगे जिससे हमेशा के लिए पानी का संकट दूर हो जाए। विभाग की टीम को मौके
पर भेजकर पूरी स्थिति पता करेंगे और फिर जितना संभव हो सकेगा प्रयास किया
जाएगा कि गांव वालों को स्वच्छ पानी मिल सके। -आरडी प्रसाद, अधिशाषी
अभियंता, जल निगम
.