फोटो - 06 जानकारी देते पूर्व जिलाध्यक्ष भारत निषाद। संवाद
कालपी। निषाद पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद द्वारा एक कार्यकर्ता के साथ कथित अभद्र व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के अगले दिन पूर्व जिलाध्यक्ष भरत सिंह निषाद खुलकर सामने आए और उन्होंने तीखे शब्दों में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को उन्होंने गुरु माना और भगवान का दर्जा दिया, उसी से मिला अपमान वह जिंदगी भर नहीं भूलेंगे।
गुरुवार को नगर स्थित एक गेस्ट हाउस में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में विधानसभा क्षेत्र के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को बुलाया गया था। कार्यक्रम के दौरान किसी बात को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद और कार्यकर्ता भरत सिंह निषाद के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। आरोप है कि इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भरत सिंह के लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। मौके पर मौजूद अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया, लेकिन नाराजगी अब भी बनी हुई है।
शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में भरत सिंह निषाद ने कहा कि पार्टी को खड़ा करने में कार्यकर्ताओं का खून-पसीना लगा है। उन्होंने अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष संगठन को मजबूत करने में लगाए, लेकिन बदले में उन्हें अपमान और कटु शब्द सुनने पड़े।
उन्होंने कहा, “मैंने डॉ. संजय निषाद को केवल नेता नहीं, बल्कि अपना गुरु माना। कई बार सार्वजनिक मंचों पर उन्हें भगवान का दर्जा दिया। लेकिन जिस तरह के शब्द मेरे लिए कहे गए, वह मेरे आत्मसम्मान पर चोट हैं। यह पीड़ा मैं जीवन भर नहीं भूल पाऊंगा।”
भरत सिंह ने कहा कि पार्टी के सामान्य कार्यकर्ताओं में भी इस घटना को लेकर नाराजगी है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि वह पार्टी के खिलाफ कोई बगावत नहीं करेंगे, क्योंकि संगठन को खड़ा करने में कार्यकर्ताओं की मेहनत लगी है। लेकिन कार्यकर्ताओं के सम्मान की अनदेखी का असर भविष्य में दिखाई दे सकता है।
राजनीतिक गलियारों में इस प्रकरण की चर्चा तेज है और माना जा रहा है कि यदि पार्टी नेतृत्व ने समय रहते नाराज कार्यकर्ताओं को नहीं मनाया तो इसका असर संगठन की जमीनी पकड़ पर पड़ सकता है।