गांवों की सरकार चुनने के लिए हुए अंतिम चरण के मतदान में भी बुजुर्ग
मतदाता जोश से भरे दिखे। उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुके बुजुर्गों ने
मतदान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। लोगों को सीख दी कि वह किसी भी हाल में
मताधिकार का प्रयोग जरूर करें। एक वोट से गांव के विकास का रास्ता बनता है।
आलम ये रहा कि कोई लाठी के सहारे तो कई बुजुर्ग
बच्चों के कंधों पर वोट
डालने पहुंचे। अंतिम चरण में कदौरा क्षेत्र के छौंक गांव में तो 100 वर्षीय
महिला ने बूथ पर पहुंचकर वोट डालकर युवाओं को प्रेरणा दी। ग्राम
पंचायत के चुनाव में मतदान का प्रतिशत चरण वार बढ़ा है। इसके पीछे बुजुर्ग
मतदाताओं के उत्साह का बड़ा योगदान माना जा रहा है। कई बुजुर्गों ने तो
स्वास्थ्य खराब होने के बाद भी मतदान
में हिस्सा लिया। चौथे चरण में भी
जमकर वोट पड़े। कदौरा ब्लाक क्षेत्र के छौंक गांव में सुबह के समय मतदान का
प्रतिशत धीमी गति से आगे बढ़ा। जब गांव के लोग वोट के गणित में उलझे हुए
थे उस समय गांव के बुजुर्ग निकले और मतदान किया। ये देखकर युवा और महिलाएं
भी मतदान करने निकल पड़ीं। गांव के 70 वर्षीय राम सिंह लाठी का सहारा लेकर
वोट
डालने गए। छौंक गांव की ही 100 साल की सियारानी ने अपने बेटे के साथ
बूथ पर पहुंचकर मतदान किया। आंखों की धुधली रोशनी भी उसके रास्ते का रोड़ा
नहीं बन पाई। मतदान करके लौटी सियारानी का कहना था कि वह मतदान के अपने
दायित्व को निभाने में कभी पीछे नहीं हटी। चुनाव कोई भी हो उसने मतदान किया
है। उसरगांव में भी बुजुर्ग मतदाता वोट डालने के लिए आगे आए।
अब कहो न मिले मौका वोट डारन को
100
वर्षीय सियारानी जब बूथ से मतदान करने के बाद लौटी और उनसे पूछा गया कि
मतदान कर आईं। उन्होंने भी तपाक से जवाब दिया जबसे वोट बनो है तब से एकऊ
दाएं ऐसे नई भवो कि वोट न डार पाओ होए। अब लगत जौ आखिरी मौका हतो वोट डार
वे को। जाने कौन दिन ऊपर से बुलउआ आए जे वई दिन जो संसार छोड़ के जाने
परहै।
दिलाएंगे चश्मा कराएंगे आंख ठीक
छौंक बूथ पर जायजा
लेने पहुंचे डीएम रामगणेश ने वहां पर मतदान के लिए बैठी सियारानी से बातचीत
की। इस दौरान उसने बताया कि आंख खराब है और चश्मा भी नहीं है। इस पर डीएम
ने कहा कि वह उनकी आंख भी बनवाएंगे और चश्मा भी दिलाएंगे। जिला अस्पताल में
यह सब सुविधा निशुल्क उपलब्ध है। उन्होंने पीठासीन अधिकारी से कहा कि इनका
मत जल्द डलवाएं।