उरई। भले ही शासन ने सभी ओपीडी शुक्रवार से खोलने के आदेश दिए हैं। जिला अस्पताल में ओपीडी 13 मई से चालू भी है पर अस्पताल में कोई फिजीशियन, सर्जन और बेहोशी वाले डॉक्टरों की कमी है। हालांकि नाक, कान गला, आंख और दंत रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ अपने अपने कक्षों में नियमित बैठते है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ एके सक्सेना का कहना है कि शुक्रवार से सभी ओपीडी सुचारु कर दी जाएगी। रही बात चिकित्सकों की कमी तो उसके लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है।
जिला अस्पताल में फिजीशियन, सर्जन और बेहोशी वाले डॉक्टरों की लंबे समय से कमी है। सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही संचालित हो रही थी। ब्लैक फंगस के मामले बढ़ने पर 13 मई से आंख, नाक, कान, गला, दंत रोग व बाल रोग विशेषज्ञ अपने कक्षों में बैठकर मरीज देख रहे थे। गुरुवार को भी अधिकांश डॉक्टरों के कक्ष खुले थे और वहां मरीज देख रहे थे। हड्डी रोग विशेषज्ञ के कक्षों के बाहर लाइन देखी गई। सीएमएस ने बताया कि शासन ने निर्देश पर अब ओपीडी संचालित की जाएगी। रिक्त पदों के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है। उधर महिला अस्पताल में कोरोना काल में भी ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं संचालित रही।
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फोटो-18-सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोंच
एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की भी सुविधा नहीं
कोंच। कोरोना को लेकर तकरीबन डेढ़ दो माह से बंद चल रहीं सरकारी अस्पतालों की ओपीडी 4 जून से खोलने के निर्देश शासन ने जारी किए हैं। जिससे अब मरीजों को इलाज को भटकना नहीं पड़ेगा। सीएचसी प्रभारी डॉ आरके शुक्ला ने बताया कि सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक मरीजों को देखा जाएगा। इमरजेंसी सेवाएं तो मरीजों को पहले ही प्राप्त हो रही हैं। हालांकि यहां डॉक्टरों की संख्या कम है। एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा से मरीजों को जरूर वंचित रहना पड़ेगा। सीएचसी की ओपीडी खुलने से नगर व क्षेत्रवासियों ने भी संतोष जाहिर किया है।
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फोटो-19-भरत पटेल
जांच की भी सुविधा मिले
कोंच। ग्राम भेंपता निवासी भरत पटेल ने कहा कि ओपीडी खुलने से खांसी, जुखाम बुखार, उल्टी, दस्त, पेटदर्द जैसी मौसम जनित छोटी छोटी बीमारियों का इलाज लोग करा सकेंगे। और उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा। जांच की भी सुविधा होनी चाहिए। टेक्नीशियन की तैनाती की जाए।
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फोटो-20-सपा अध्यक्ष छोटू टाइगर
जरूरी जांचें नहीं हो पाना अफसोसजनक
कोंच। सपा नेता छोटू ने ओपीडी खुलने के बाद भी सीएचसी में इलाज की मुकम्मल जांचों की व्यवस्था नहीं हो पाने को लेकर अफसोस जताया है। कहा कि सीएचसी में टेक्नीशियन नहीं होने से एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा रोगियों को नहीं मिल पा रही है।
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फार्मासिस्ट के सहारे 30 हजार आबादी
सरावन। पीएचसी सरावन में पिछले दस साल से चिकित्सक नहीं है। करीब तीस हजार की आबादी फार्मासिस्ट के सहारे है। ग्रामीण महेश, सुनील, बबलू आदि का कहना है कि कोरोना काल में यहां की आबादी झोलाछाप के भरोसे रही।
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एलटी न होने से परेशानी
सिरसाकलार। पीएचसी सिरसाकलार में एलटी की तैनाती न होने से मरीजों को बाहर इलाज के लिए भटकना पड़ता है। न्यू पीएचसी के प्रभारी डॉ प्रदीप कुमार का कहना है कि उनके यहां स्टाफ पूरा है। एलटी की तैनाती नहीं है। जिसकी वजह से मरीजों को जांच के लिए 12 किलोमीटर दूर कुठौंद या अन्य स्थानों पर जाना पड़ता है।