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उपेक्षा का शिकार ऐतिहासिक धार्मिक स्थल तुलसी चबूतरा

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-उपेक्षा का शिकार तुलसी चबूतरा। - फोटो : ORAI
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रामपुरा। धार्मिक स्थल तुलसी चबूतरा प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो गुमनामी में ध्वस्त होता जा रहा है। ग्राम जगम्मनपुर बाजार में गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की विश्राम स्थली पर बना तुलसी चबूतरा प्रशासनिक अनदेखी के कारण नष्ट होता जा रहा है।
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विक्रमी संवत 1657 में पंचनद संगम पर स्थित आश्रम में साधनारत तत्कालीन सिद्ध संत मुकुंदवन (बाबा साहब) महाराज की प्रसिद्धि सुनकर गोस्वामी तुलसीदास जलमार्ग से पंचनद संगम पर आए। बाबा साहब मंदिर के सामने मौजूद खड़े प्राचीन विशाल पीपल के वृक्ष के नीचे दोनों संतों का मिलन हुआ। तुलसीदास जी के आगमन की जानकारी होने महाराजा जगम्मनदेव अपने लाव-लश्कर सहित संत शरण में पहुंचे और निर्माणाधीन जगम्मनपुर किला पधारने का आग्रह किया।
संत मुकुंदवन के कहने पर तुलसीदास जी जगम्मनपुर पधारें और उन्होंने अपने हाथ से जगम्मनपुर के निर्माणाधीन किला की देहरी रोपित की, जो किला के प्राचीन प्रवेश द्वार पर आज भी सुरक्षित है। तुलसीदास जी ने महाराज जगम्मनदेव को शंख, एकमुखी रुद्राक्ष प्रदान किया। इस दौरान उन्होंने राजा द्वारा बसाए जा रहे गांव जगम्मनपुर में 14 दिन तक प्रवास किया। राजा जगम्मनदेव ने अपने किले से 50 मीटर दूर पूर्वोत्तर दिशा में एक विशाल चबूतरे का निर्माण कराया। वह आज जर्जर ध्वस्त हालत में है।
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हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान सालिगराम जी दाहिना वर्ती शंख, एक मुखी रुद्राक्ष को सिंहासनारुण कराकर जगम्मनपुर किला से आम दर्शनार्थ तुलसी चबूतरा तक लाया जाता है। वर्ष में एक दिन इस ऐतिहासिक चबूतरा के आसपास थोड़ी बहुत साफ सफाई करवा दी जाती है। पूरे वर्ष भर इस पर अन्ना का कब्जा रहता है। बाजार के दुकानदारों एवं ग्राहक यहां गंदगी फेंकते है। जगम्मनपुर व्यापार मंडल अध्यक्ष विजय द्विवेदी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस पवित्र स्थल का जीर्णोद्धार कराकर चबूतरे पर तुलसीदास जी की मूर्ति स्थापित कराने एवं परिक्रमा मार्ग को पक्का कराने व ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को संरक्षित करने की मांग की है।
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