उरई। हिंदुस्तान यूनिलीवर की फैक्टरी बंद करने का मामला बुधवार को फिर गरमा गया। फैक्टरी के 50 से ज्यादा कर्मचारियों ने डीएम को ज्ञापन देकर मदद की गुहार लगाई है। कर्मचारियों का कहना है कि फैक्टरी को बंद किया जा रहा है। कर्मचारियों को बचा लीजिए। वहीं, डीएम ने एडीएम को जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
हिंदुस्तान यूनिलीवर के कर्मचारियों ने डीएम राजेश कुमार पांडेय को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन दिया है। इसमें लिखा है कि वह लोग इतने दिनों तक कंपनी के अधिकारियों की धमकी की वजह से चुप रहे। अब तो मशीनों को बाहर भेजा जा रहा है। अगर अब नहीं बोलेंगे तो हमारे परिवार तबाह हो जाएंगे।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि फैक्टरी के प्रबंधन ने यूनियन की सांठगांठ से कर्मचारियों के साथ धोखाधड़ी की है। वर्ष 1989 में शहर के कालपी रोड स्थित फैक्टरी एरिया में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के शासन काल में हिंदुस्तान यूनिलीवर की फैक्टरी लगाई गई थी। कंपनी अभी तक मुनाफा देती रही और समय-समय पर सरकारी सब्सिडी का लाभ भी लेती रही।
कर्मचारियों ने बताया कि मार्च 2025 तक फैक्टरी में उत्पादन होता रहा और कर्मचारियों को वेतन मिलता रहा। अप्रैल में कंपनी के कार्मिक प्रबंधक जसवीर सिंह, भरत चौधरी, उत्पल आनंद ने सूचना दी कि अब उरई फैक्टरी के लिए उत्पादन मिलना संभव नहीं है। साथ ही बोर्ड पर नोटिस लगाया गया कि फैक्टरी के मैनेजर जीडी पाटिल ने निर्णय लिया है कि कुछ कर्मचारियों को अन्य प्रदेशों की नासिक, छिंदवाड़ा, खामगांव, कोलकाता आदि यूनिट में स्थानांतरित किया जाएगा।
फैक्टरी के कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कंपनी ने कर्मचारियों को आसपास जैसे सुमेरपुर, एटा, हरिद्वार, राजपुरा, जैसे बड़े कारखानों में स्थानांतरण नहीं किया। इससे कंपनी की मंशा जाहिर होती है। उनका आरोप है कि कंपनी कर्मचारियों के स्थानांतरण के नाम पर छंटनी करके निष्कासित करना चाहती है। कर्मचारियों ने बताया कि जब उन्होंने प्रबंधन व यूनियन से बात की तो उन्होंने प्रलोभन दिया और अपने पक्ष में समझौता करने के लिए तैयार कर लिया। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रबंधन ने कुछ लोगों को आसपास की फैक्टरियों में बाद में लाने का भी प्रलोभन दिया है।
वही, कुछ कर्मचारियों ने नासिक, कोलकाता के लिए भी आवेदन किया था, लेकिन इसे प्रबंधन ने स्वीकार नहीं किया। कर्मचारियों ने कहा कि 30 से 35 वर्षों तक काम करके उन्होंने कंपनी को ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, इसलिए फैक्टरी को आसानी से बंद नहीं होने देंगे। कंपनी के अधिकारी फैक्टरी के चालू होने की बात कह रहे हैं, जबकि उत्पादन बंद हुए एक माह से अधिक का समय हो गया है। उन्होंने मांग की कि यदि फैक्टरी को बंद करना है तो सभी कर्मचारियों को जून माह से पूरी सेवाकाल तक पूरा वेतन दिया जाए। साथ ही हर माह भविष्य निधि का हिस्सा भी उनके खाते में जमा किया जाए।
इस दौरान कृष्ण कुमार शर्मा, वीरेंद्र कुमार सविता, मनोज विश्वारी, कमलेश कुमार, जयनारायण पाल, मलखान सिंह राजपूत, महेंद्र सिंह कुशवाहा, अरुण कुमार तिवारी, शैलेंद्र कुमार प्रजापति, रामपाल, अशरफ खान, देवकी नंदन, कौशल किशोर, बालमुकुंद, उमाकांत सहित करीब 50 कर्मचारी मौजूद रहे।
बोले कर्मचारी
फोटो 12- अमर सिंह।
कंपनी के दबाव में रोटी-रोजी के लिए मोहताज होंगे कर्मचारी
फैक्टरी के कर्मचारी अमर सिंह का कहना है कि कर्मचारियों को कंपनी बंद होने से बेरोजगार होकर घर बैठना पड़ेगा। कंपनी ने दबाव बनाकर जो निर्णय लिया है, उससे सैंकड़ों कर्मचारियों की आजीविका चली गई है।
फोटो 13- वीरेंद्र कुमार सविता
जन प्रतिनिधि भी साधे चुप्पे
वीरेंद्र कुमार सविता का कहना है कि कंपनी के बंद होने से सैकड़ों लोग बेरोजगार हो गए हैं। वहीं, अभी तक कोई जनप्रतिनिधि न तो कर्मचारियों से मिला है, न कोई प्रतिक्रिया व्यक्त की है। साजिशकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाए और कंपनी को दोबारा से चलाया जाए।
-कर्मचारियों ने जिलाधिकारी से मुलाकात की है, इसकी जानकारी नहीं है। यह जांच का विषय है, इसे कंपनी देखेगी।
- उत्पल आनंद, कंपनी एचआर हेड
-कुछ लोगों ने कार्यालय आकर फैक्टरी के बंद होने की बात करते हुए ज्ञापन दिया है। इस पर एडीएम की अगुवाई में टीम बनाई गई है, जो जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद आगे कुछ कहा जा सकता है।
- राजेश कुमार पांडेय, डीएम जालौन