आदर्श संस्कृत महाविद्यालय के प्रांगण सिद्धेश्वर महादेव के मंदिर में मानव
जीवन केे लिए बुधवार को षोडश संस्कार का आयोजन किया गया। इसमें तीनोें
वर्णों का उपनयन (जनेऊ धारण) वेदारंभ एवं समावर्तन संस्कार वैदिक परंपरा
एवं मंत्रोच्चारण के साथ किया गया। इस मौके पर बटुकों का प्रात: 5.30 बजे
क्षौर कर्म, सामूहिक बटुक भोज एवं मंडप प्रवेश के
साथ गणपति पूजन भी कराया
गया। इस मौके पर प्राचार्य डा. जगप्रसाद चतुर्वेदी ने बताया कि मानव जीवन
में बिना जनेऊ धारण के किसी भी प्रकार का धार्मिक कृत्य निष्फल हो जाता है।
जैसे कि उपनिषदों ने बताया कि न कुर्यानिन्नष्फलम
कर्म-निष्फल कर्म नहीं
करना चाहिए। इस अवसर पर प्रबंधक विनोद चतुर्वेदी, देवकीनंदन बुधौलिया,
शालिगराम शास्त्री, श्याम मोहन शुक्ला, ब्रजमोहन तिवारी, उमेश चंद्र,
काशीप्रसद, पवन नायक आदि मौजूद रहे।