सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड में सिंचाई से लेकर पीने के पानी का संकट सामने आया तो प्रशासन की नींद टूटी है। पानी की बर्बादी रोकने और उसके संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए जनपद में अस्तित्व खो रहे पाताल तोड़ कुओं का सदुपयोग करने की योजना प्रशासन ने तैयार की है। कुओं के पानी को संरक्षित करने के लिए चेकडैम बनाए जाएंगे। इसके लिए
पांच कुओं का चयन किया गया है और पहले दौर में 25 चेकडैम बनाने की योजना है। गौरतलब हो कि सूखा पड़ा तो शासन व प्रशासन को स्थायी जल स्रोतों का महत्व समझ में आया है। यही वजह है कि अब मुख्य फोकस स्थायी जल स्रोतों पर ही है। गांव के साधारण कुएं हों या फिर पाताल तोड़, तालाब, पोखर इनका अस्तित्व बनाए रखने की पहल की जा रही है। मालूम
हो कि पाताल तोड़ कुएं बरसात के समय में ओवर फ्लो होकर बहने लगते हैं। बरसात हो या फिर सर्दी या गर्मी का मौसम यह कुएं खूब पानी उगलते रहे हैं। सिंचाई से लेकर पीने तक में इसका प्रयोग पूर्व के समय में होता रहा है। इन कुओं में पानी की कभी कमी नहीं रहती। इस बात को ध्यान में रखकर जिला प्रशासन ने पानी के संरक्षण के लिए पाताल तोड़ कुओं को
अपनी योजना में शामिल किया है। मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि जिले में पाताल तोड़ कुओं के पास पानी का स्टोर करने के लिए चेकडैम बनाने की योजना है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत पहले दौर में पाताल तोड़ कुओं के पास 25 चेकडैम बनाए जाएंगे। इसके लिए नदीगांव ब्लाक क्षेत्र के खजुरी, कोंच क्षेत्र के छिरावली, डकोर ब्लाक
के धुरट व नुनवई, माधौगढ़ ब्लाक के गोपालपुरा गांव के पाताल तोड़ कुएं चिह्नित किए हैं। एक कुएं के नजदीक पांच चेकडैम बनाए जाने की योजना है। यह कार्य बरसात शुरू होने के पहले कराया जाएगा।
238 कुओं का हो रहा जीणोद्धार
गांव के कुओं को सजाने संवारने के लिए योजना पर तेजी से काम शुरू किया गया है। जिला प्रशासन ने 542 कुएं चिह्नित किए थे जिनका जीर्णोद्धार कराया जाना था। इसमें से 238 पर काम शुरू करा दिया गया है। यह कुएं एक सप्ताह में फिर से उपयोगी साबित होने लगेेंगे। सीडीओ एसपी सिंह ने कहा कि जिन कुओं पर काम शुरू नहीं हुआ है वहां पर जल्द काम शुरू कराया जाएगा। इसके लिए खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।