उरई। फाइलेरिया उन्मूलन के लिए चल रहे अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सरावन (माधौगढ़) गांव जाकर मरीजों को फाइलेरिया की दवा खिलाई। जनवरी माह में चले फाइलेरिया खोजी अभियान में 42 फाइलेरिया के संभावित मरीज मिले थे। इसमें 39 अकेले सरावन गांव के थे। इसके चलते सीएमओ के निर्देश पर सरावन में विशेष अभियान चलाया गया।
जिला मलेरिया अधिकारी डा. जीएस स्वर्णकार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जनवरी माह में माइक्रोप्लान बनाकर जिले के औता, सरावन, छौंकए चुर्खी, औरेखी भिटारा, अकनीवा के साथ पटेलनगर उरई, कछोरन जालौन में रात में अभियान चलाया था। इसमें रात आठ से रात 12 बजे तक चिह्नित क्षेत्र से पांच पांच सौ लोगों समेत कुल आठ हजार लोगों की स्लाइड बनाई गई थी। जांच के दौरान सरावन के 39 लोगों व औरेखी के एक तथा पटेलनगर मोहल्ले के दो लोगों में फाइलेरिया के बैक्टीरिया होने के लक्षण मिले। ऐसे लोगों को लक्ष्य बनाकर उन्हें फाइलेरिया की दवा खिलाई गई। बायोलाजिस्ट सीएस बघेल के नेतृत्व में टीम ने सरावन गांव जाकर लारवीसाइड दवा का छिड़काव कराया, फाइलेरिया से होने वाले नुकसान बताए और दवा खाने के लिए गांव वालों को प्रेरित किया। इसके साथ ही संभावित 39 में से 38 लोगों को फाइलेरिया नियंत्रण के लिए दवा खिलाई। वर्तमान में जनपद में 734 फाइलेरिया के मरीज है।
एसीएमओ डा. सत्यप्रकाश ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे अभियान में साढ़े पंद्रह लाख से अधिक लोगों को दवा खिलाई जानी है। कुछ जगह विरोध हो रहा हैए लोगों को समझाया जा रहा है कि उन्हें दवा खाना जरूरी है। यदि दवा खाने के बाद उनके शरीर में किसी तरह की प्रतिक्रिया होती है तो इससे यह पता चलता है कि उनके शरीर में फाइलेरिया के बैक्टीरिया मौजूद है और उन्हें दवा खाना बहुत जरूरी है।