श्रावण मास की शुरुआत बुधवार से हो गई। जनपद के सभी प्रमुख मंदिरों में इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त उमड़ पड़े। सावन शुरू होते ही जालौन, कोंच, माधौगढ़, कालपी और आसपास के क्षेत्रों के सभी प्रसिद्ध मंदिरों पर विशेष इंतजाम किए गए थे। पुलिस के भी इंतजाम रहे। सावन शुरू होते ही शहरवासी भक्ति रस में डूबे नजर आए। पंडितों व महंतों ने
श्रावण मास में शिव पूजा के महत्व पर प्रकाश डाला। पंडित गौरव जी ने बताया कि शिव को देवों का देव महादेव कहा जाता है। इनके मस्तक पर चंद्रमा व जटाओं में गंगा का वास है। शिव को श्रावण मास अत्यंत प्रिय है इसलिए इस महीने में शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। बताया कि शास्त्रों में शिवलिंग पूजा के कुछ नियम-विधान बताये गए है। इनमें
जिस जगह पर शिवलिंग स्थापित हो, पूजा करते वक्त उससे पूर्व दिशा की ओर मुख करके नहीं बैठना चाहिए। शिवलिंग से उत्तर में भी न बैठें क्योंकि इस दिशा में भगवान शंकर का बायां अंग होता है एवं देवी उमा का स्थान होता है। शिवलिंग से पश्चिम दिशा में बैठना भी उचित नहीं रहता है। इस दिशा में भोले बाबा की पीठ होती है। इस कारण पीछे से देव पूजा
करने से शुभ फल नहीं मिलता है। शिवलिंग से दक्षिण दिशा में ही बैठकर पूजन करने से मनोकामना पूर्ण होती है। उज्जैन के दक्षिणामुखी महाकाल और अन्य दक्षिणामुखी शिवलिंग
पूजा का बहुत अधिक धार्मिक महत्च है। पूजा में दक्षिण दिशा में बैठकर साथ में भक्त को भस्म का त्रिपुण्ड लगाना चाहिए। रुद्राक्ष की माला पहननी चाहिए और बिना कटे-फटे बिल्व पत्र अर्पित करना चाहिए। शिवलिंग की कभी पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। आधी परिक्रमा करना ही शुभ होता है।
विभिन्न अभिषेकोें का अलग फल
-दूध से अभिषेक करने पर परिवार में कलह, अवसाद व अनचाहे दु:ख व कष्टों आदि का निवारण होता है।
-वंश वृद्धि के लिए घी की धारा डालते हुए शिव सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए।
-इत्र की धारा डालते हुए शिव का अभिषेक करने से भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
-जलधारा डालते हुए अभिषेक करने से मानसिक शांति मिलती है।
-शहद की धारा डालते हुए अभिषेक करने से रोग से मुक्ति मिलती है। परिवार में बीमारियों का अधिक प्रकोप नहीं रहता है।
-गन्ने के रस की धारा डालते हुए अभिषेक करने से आर्थिक समृद्धि व परिवार में सुखद माहौल बना रहता है।
- गंगा जल से अभिषेक करने पर चारो पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है। अभिषेक करते समय महामृत्युंजय का जाप करने से फल की प्राप्ति कई गुना अधिक हो जाती है। ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है।
-सरसों के तेल की धारा डालते हुए अभिषेक करने से शत्रुओं का शमन होता है। रुके काम बनने लगते हैं व मान-सम्मान में वृद्धि होती है।