जाती हैं। ऐसे में नियमित रूप से सुबह शाम आधा घंटा सूर्य की रोशनी में बैठना चाहिए। इससे सभी बीमारियां दूर हो सकती हैं। कई देशों और उनके राष्ट्राध्यक्षों के निजी चिकित्सक रह चुके डॉ. रामावत ने यह बात पालिका परिसर में आयोजित चिकित्सकों की एक कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा कि शरीर के एक-एक अवयव में विटामिन-डी होता है और जहां भी इसकी
कमी हुई, वहीं बीमारी जन्म लेना शुरू कर देती है। कोई महिला गर्भ से है और उसके अंदर विटामिन-डी की कमी है तो उसके बच्चे में विकृतियां पैदा हो जाती हैं। ऐसी महिलाओं को प्रचुर मात्रा में विटामिन-डी युक्त आहार लेने की आवश्यकता है। कहा कि अगर कैल्शियम पर्याप्त होने के बावजूद शरीर में विटामिन-डी की कमी है तो वह कैल्शियम काम नहीं करेगा। यह भी
बताया कि खून में विटामिन-डी पर्याप्त मात्रा में होता है लेकिन फिर भी ब्लड टेस्ट करवाते रहना चाहिये। विटामिन डी की कमी से आदमी की तोंद निकल आना, घुटनों का दर्द, शरीर के अन्य दर्द, अस्थमा, रेकेट्स आदि बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे में विटामिन-डी के इंजेक्शन, टेबलेट्स, सिरप या अन्य रूप में इसे लेकर पूरा करना पड़ता है। यह विटामिन-डी शरीर के लिए
संजीवनी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि विज्ञान विशारद सीरौठिया ने डॉक्टर दंपति के प्रति आभार जताया। इस दौरान ऐल्डर्स कमेटी के वरिष्ठतम
सदस्य महंत ब्रजभूषणदास एडवोकेट, नीमा अध्यक्ष डॉ. सुशील तिवारी, डॉ. आरबी जैन, डॉ. दिनेश उदैनिया, डॉ. बाबूराम शर्मा, डॉ. एलआर श्रीवास्तव, डॉ. पीडी चंदेरिया, डॉ. प्रदीप गर्ग, डॉ. जितेन्द्र ठाकुर, डॉ. अनिल झा, डॉ. आनंद गुप्ता, डॉ. सतीश शुक्ला, डॉ. ब्रजेश श्रीवास्तव, डॉ. हर्षबर्द्घन गुप्ता, डॉ. केएन निरंजन आदि मौजूद रहे।