नगर में बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा धूमधाम से मनाया गया। बावड़ी के मैदान में राम व रावण के बीच घमासान युद्ध के मंचन के साथ ही रावण की पुतला दहन किया गया। रावण का पुतला दहन के सा ही पूरा क्षेत्र जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
इसके पहले रामलीला भवन से उमाशंकर चतुर्वेदी की अगुवाई में श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान, सुग्रीव, जामवंत तथा रावण की शोभायात्रा निकाली गई। बाद में रामलीला कमेटी की ओर से अतिथियों का सम्मान किया गया। रामलीला मंचन के दौरान दर्शाया गया कि राम के वाण से रावण की मृत्यु नहीं हुई।
तब विभीषण ने श्रीराम को बताया कि रावण की नाभि में अमृत कुंड है। यदि उस कुंड को सुखा दिया जाए तो रावण की मृत्यु हो जाएगी। तब श्रीराम ने एक साथ 31 वाणों को छोड़कर रावण पर प्रहार किया। जिसमें उक्त वाणों ने रावण के दसों सिर व बीस भुजाओं को काटने के साथ ही एक वाण रावण की नाभि में जा लगा।
जैसे नाभि का अमृत कुंड सूखा वैसे ही रावण मूर्छित होकर जमीन पर गिर पड़ा। इसी दौरान प्रभु राम ने लक्ष्मण को राजनीति के गुण सीखने के लिए रावण के पास भेजा। लक्ष्मण द्वारा रावण के सिरहाने खड़े होकर कई बार प्रश्न पूछने की चेष्टा की गई, लेकिन रावण ने उनके एक भी प्रश्न का उत्तर नहीं दिया।
इस पर राम ने लक्ष्मण को बताया कि कभी किसी से कुछ प्राप्त करना हो, तो उससे अनुनय विनय करके ही प्राप्त किया जा सकता है। तब लक्ष्मण ने रावण के चरण की ओर खड़े होकर प्रश्न किए। जिस पर रावण ने लक्ष्मण के न केवल प्रश्नों का उत्तर दिया बल्कि नाना प्रकार के गुण भी सिखाए।
इस अवसर पर जिलाधिकारी रामगणेश ने कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नगर के वयोवृद्ध साहित्यकार व गीतकार पं. पूरन चंद्र मिश्र को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन मित्र मंडल के संयोजक सुशील कुशवाहा ने किया।
इस दौरान रामलीला समिति के अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी, दशहरा मेला समिति के अध्यक्ष राजेश शुक्ला, कोषाध्यक्ष गौरीश द्विवेदी के अलावा डॉ. बृजेंद्र द्विवेदी, दीपक मित्तल, आलोक खन्ना, लक्ष्मीकांत शाक्य, जय नारायण राठौर, राजासिंह सेंगर, सलिल शुक्ला, प्रभात माहेश्वरी, उमा महाराज, रामजी अग्रवाल, विवेक अग्रवाल आदि मौजूद रहे।