उरई/कालपी। भगवान गजानन की विशेष आराधना का महोत्सव शुक्रवार को गणेश चतुर्थी पर शुरू हो गया। शहर से लेकर कसबों तक जगह-जगह भव्य पंडालों में गाजे बाजे के साथ लंबोदर की मूर्तियां स्थापित की गईं। इस दौरान पंडाल गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से गूंज उठे। शाम को पंडालों में बच्चों के लिए प्रतियोगिता भी हुई।
उरई में माहिल तालाब के पास मराठा मित्र मंडल ने भगवान विनायक की मूर्ति भव्य शोभायात्रा निकाली। शोभयात्रा का लोगों ने जगह जगह पर स्वागत किया गया। इसके बाद पंडाल में मूर्ति की स्थापना की गई। इसमें महिलाओं ने भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। पूजा के पश्चात आरती और प्रसाद वितरण किया गया। रामनगर, इंद्रानगर, पटेल नगर और स्टेशन रोड पर भी गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की गई है। घरों में भी मूर्ति स्थपना कर पूजा की गई।
कालपी के श्याम पैलेस सांस्कृतिक मंडल ने श्याम पैलेस में गणेशजी की मूर्ति की स्थापना कराई। पांच दिवसीय महोत्सव के पहले दिन भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा थ। श्याम किशोर गुप्ता, अखिलेश गुप्ता, संजय गुप्ता, कल्लू मिश्रा, संदीप गुप्ता, कपिल गुप्ता, हरभूषण सिंह, सुरेंद्र मिश्रा, भारत सिंह यादव आदि मौजूद रहे।
जालौन में निकाली गई शोभायात्रा
श्रीगणेश मित्र मंडल एवं सर्राफा व्यापार संघ ने बाजार बैठगंज स्थित बेनीबाई मार्केट में गणेश जी की मूर्ति की स्थापना कराई। इसके पहले शहर में भगवान की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें डीजे की धुन पर भक्त गणपति बप्पा मोरया के जयकारे लगाते चल रहे थे। मंडल के अध्यक्ष संतोष धार्गे ने बताया महोत्सव छह दिन तक चलेगा। 27 अगस्त को भजन संध्या, 30 अगस्त को प्रसाद वितरण और 31 को शोभायात्रा के साथ मूर्ति विसर्जन किया जाएगा। मोहल्ला गणेशजी स्थित श्रीगणेश मंदिर पर भी उत्सव मनाया गया। यहां भक्तों ने गोले दागकर श्रीगणेशजी का जन्म उत्सव मनाया। सुरेश सुतार, नितेश यादव, चंद्रशेखर सोनी, तानाजी तनपुरे, प्रदीप सुतार, कपिल देवकते, ओमप्रकाश मौर्या, जालंधर राव, सुनील मोरे अजय हिंगड़े, बालू सेठ, महेश पराशर, सुनील ताम्रकार, आलोक याज्ञिक, अक्षत चंसौलिया, नीरज द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
कोंच में भी सजे विघ्नहर्ता के दरबार
कोंच। नगर में भी भगवान विघ्नहर्ता के भव्य दरबार सजाए गए हैं। प्राचीन गढ़ी स्थित गणेश मंदिर में गणेश सेवा समिति ने विशाल गणेशजी की मूर्ति की शोभायात्रा निकाली। इसमें सुशील दूरवार, मानवेन्द्रसिंह, राहुल तिवारी, अजित रिछारिया, सुधीर सोनी, अभिषेक रिछारिया, गौरव सोनी, सतीश राठौर, ब्रजपालसिंह, अश्विनी सेठ, हर्ष निरंजन, कल्लू यादव, मृदुल दांतरे, ऋषि झा, बादाम आदि शामिल रहे। रामकुंड गणेश समिति ने भी शोभायात्रा निकालकर मूर्ति की स्थापना की। लवली चौराहा, डॉ. बलराम के पास, गल्ला मंडी में मूर्तियों की स्थापना की गई। ग्राम भेंड़ के श्री गणेश मंदिर पर ग्रामीणों ने झांकी सजायी। 26 अगस्त से पं. कृष्णकांत वाजपेयी श्रीराम कथा सुनाएंगे।
पेशवा बाजीराव ने कोंच में शुरू किया था गणेशोत्सव
प्रेयसी मस्तानी से अपने प्रेम को जीवंत रखने के लिए शुरू की थी परंपरा
महोत्सव से आमजन को जोड़ने के लिए बाहर से आईं गणिकाएं करती थीं नृत्य
रमेश तिवारी/ राहुल राठौर
कोंच। नगर में गणेश महोत्सव की शुरुआत 18 वीं शताब्दी में बाजीराव पेशवा प्रथम ने की थी। गणेशोत्सव से आम जन से जोड़ने के लिए नृत्य के लिए बाहर से गणिकाओं को बुलाया जाता था। गणेशोत्सव में नृत्य की परंपरा करीब तीन दशक पहले तक चल रही थी लेकिन अराजकता और सामाजिक वर्जनाओं के चलते इसे खत्म कर दिया गया। युवा वर्ग धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा गणेशोत्सव का जीवंत रखे हैं।
कोंच क्षेत्र मराठों के अधिकार में रहा है। इतिहसकार डॉ. जगदीश गुप्ता ने बताया कि बाजीराव पेशवा ने प्रेयसी मस्तानी के साथ अपने प्रेम को जीवंत बनाए रखने के लिए सन् 1730 में कोंच में गणेश महोत्सव की परंपरा शुरू की थी। महोत्सव आमजन का आयोजन बन सके इसके लिए गणिकाओं के नृत्य की परंपरा डाली गई। बीसवीं शताब्दी के आठवें दशक तक वनारस, शिवपुरी, मुरैना की दो सैकड़ा से अधिक गणिकायें नृत्यकला का प्रदर्शन कर उपहार पाती थीं। अराजकता के चलते धीरे धीरे ये परंपरा बंद हो गई। पिछले तीन दशक यहां का गणपति महोत्सव संक्रमण काल से गुजरा। अब नौजवानों ने फिर महोत्सव को जीवित कर सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का काम किया है। नगर के मसलन लवली चौराहा, पसरट बाजार, रामगंज, नईबस्ती, तिवारी के गणेश, बुलबुल के गणेश, महादेव चौधरी के गणेश, गल्ला मंडी के गणेश महोत्सव आसपास के क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं। बताते हैं पहले नगर में करीब सौ जगह गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाती थीं। प्राचीन गढ़ी पर स्थित गणेश मंदिर में नृत्यरत बाल गणेश की मूर्ति इसी प्रमाण है। बड़ी माता मंदिर और लक्ष्मीनारायण मंदिर (बड़ा मंदिर) में स्थापित गणेशजी की मूर्तियां भी दंतकथाओं को प्रमाणित करती हैं।