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दो बार चटकी पटरी से गुजर चुकी हैं ट्रेनें, फिर भी नहीं दिख रही सर्तकता

Mon, 13 Feb 2017 10:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
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जीआरपी थाने के बाहर पसरा सन्नाटा। - फोटो : अमर उजाला
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पुखरायां रेल हादसे के बाद भले ही देश भर के स्टेशन के अधिकारी एलर्ट हो गए हों, लेकिन माडल स्टेशन उरई का हाल कुछ अलग ही है। वह भी तब, जब सप्ताह के भीतर दो-दो बार रेल पटरी चटकी पाई गई और एटीएस ने भी आकर जांच पड़ताल की। फिर भी स्टेशन पर सुरक्षा नाम की कोई चीज नजर नहीं आती है। आलम यह है कि जीआरपी और आरपीएफ थानों के
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गेट पर भी कोई सिपाही नजर नहीं आता है। फिर स्टेशन की सुरक्षा का क्या भरोसा किया जाए। बता दें कि हाल ही में पुखरायां रेल हादसे में आतंकी साजिश की पुष्टि के बाद सभी रेलवे

स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। ट्रेनों और रेलवे ट्रैक की न सिर्फ बराबर निगरानी की जा रही है बल्कि समय समय पर यात्रियों की भी तलाशी ली जा रही है। प्रस्तुत है स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर आधारित पड़ताल करती लाइव रिपोर्ट-
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न कोई चेकिंग और न ही टोकाटाकी
यूं तो उरई स्टेशन पर भी जीआरपी और आरपीएफ के थाने है, पर सतर्कता के नाम पर कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा है। सोमवार की दोपहर करीब 12 बजे का हाल यह था कि दोनों प्लेटफार्मों पर आठ-दस संदिग्ध से लगने वाले पुरुष और महिलाएं यात्रियों की बेंच पर सो रहे थे। उनकी नींद में खलल डालना न तो स्टेशन अधिकारियों ने ही उचित समझा और न ही

जीआरपी ने। प्लेटफार्मों पर जगह-जगह बोरियां और बक्से लावारिस पड़े थे। इन्हें भी टटोलने वाला कोई नहीं था। यही हाल स्टेशन के मेन गेट का भी था। यहां पुलिस तो दूर रेलवे का

एक सफाई कर्मी भी नहीं था। कोई, कुछ भी लेकर स्टेशन के भीतर तक घुस रहा था। उनके सामान को देखने वाला भी कोई नहीं था। इस बावत जब जिम्मेदार अधिकारियों से पूछा गया तो जवाब मिला कि मौजूदा संसाधन काफी कम हैं।

थानों का पता ही नहीं चलता
एक नंबर प्लेटफार्म पर देखने को तो आरपीएफ और जीआरपी दोनों के थाने बने हैं, लेकिन वहां थाने सा कुछ दिखता नहीं है। न तो पहरे पर सिपाही और न ही थानों के बाहर पुलिस कर्मियों की चहलकदमी। और तो और भीतर बैठे इक्का दुक्का पुलिस कर्मी भी मानो खाकी वर्दी पहनने की जरूरत ही नहीं समझते हैं।

सड़क की तरह पार किया जाता ट्रैक
दोनों प्लेटफार्मों के बीच की दूरी पार करने के लिए पैदल पुल भी शोपीस बनकर रह गया है। पुलिस के सामने ही यात्री जान हथेली पर लेकर ट्रैक तो मानों सड़क की तरह पार करते हैं। न कभी कोई अभियान चलता है, और न ही कभी किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है। यही नहीं आवारा जानवरों के अलावा साइकिल क्या मोटरसाइकिल सभी कुछ प्लेटफार्म पर दौड़ते नजर आते हैं।

थाने के सामने ही चटकी मिली थी पटरी
बीते सप्ताह भुआ स्टेशन के पास चटरी पटरी मिलने के दो दिन बाद ही स्टेशन के आरपीएफ थाने के सामने ट्रैक चटका मिला था। इसे रेल अधिकारियों ने यह कहकर टाल दिया था, कि ओवरलोडिंग और मौसम में बदलाव की वजह से ऐसा हुआ था। यदि कोई हादसा हो जाता तब शायद रेल अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते।

क्या कहते हैं मुसाफिर
झांसी निवासी सुरेंद्र पाल का कहना है कि हर साल रेल बजट पर करोड़ों का खर्च दिखाया जाता है, कम से कम उरई स्टेशन को देखकर ऐसा लगता है कि मानों इसे सालों से बजट का इंतजार हो। ग्वालियर के लिए ट्रेन का इंतजार कर रही महिमा अग्रवाल का कहना है कि वे करीब डेढ़ घंटे से प्लेटफार्म पर हैं, उन्हें एक भी महिला सिपाही नहीं दिखाई दी। यदि महिलाओं को कोई दिक्कत हो, तो वे किसके पास जाएंगी।
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