जिला पंचायत सभागार में बुधवार को सिंचाई बंधु की बैठक में नहर संचालन का मुद्दा छाया रहा। किसानों ने कहा कि 10 मई से नहरें शुरू की जानी थी लेकिन विभागीय अधिकारियों ने रोस्टर ही बदल दिया। इससे जायद फसल की सिंचाई नहीं हो पा रही है। तालाबों की भराई भी नहीं हो पा रही है जिससे मवेशियों को सूखा के इस दौर में परेशान होना पड़ रहा है। इस
दौरान नहर विभाग के लोगों ने बताया कि नहरें दस दिन चलाने के लिए मात्र चार क्यूसेक पानी उपलब्ध है। बैठक में रामगंगा कमांड के सभी डिवीजन के अधिकारियों के गैरहाजिर रहने पर पूरी डिवीजन का वेतन रोक दिया गया। बैठक में नहर विभाग मुख्य निशाने पर रहा। किसान नेता बलराम सिंह लंबरदार ने कहा कि नहर का पानी सबसे अधिक जालौन क्षेत्र के
किसान ले रहे हैं। यहीं के आधार पर रोस्टर बनाया जाता है। इस मर्तबा रोस्टर में बदलाव कर दिया गया। इससे समय से नहरें नहीं चल पाई। तालाब सूखे पड़े हैं नहरों से धूल उड़ रही है। फसलें सूख रही है। किसानों ने मांग की कि नहरों का पानी फुलगेज से चलाया जाए। नहर विभाग के अधिकारियों ने कहा कि पानी की उपलब्धता10 दिन के लिए ही है। इसके बाद
नलकूप की रिपोर्ट रखी गई। इसमें तालाब भराई पर किसानों ने सवाल उठाए। खराब नलकूपों के सही न होने पर किसानों ने नाराजगी जताई। पूरे जिले में 639 नलकूप के सापेक्ष 70 नलकूप खराब हैं। इसमें कोई यांत्रिक तो कुछ बिजली दोष से खराब चल रहे हैं। इस पर सीडीओ एसपी सिंह ने निर्देश दिए कि नलकूप जल्द ठीक कराएं जाए। रामगंगा कमांड के
अधिकारियों के गैरहाजिर रहने पर वेतन रोकने की कार्रवाई की है। सीडीओ ने नहर विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अंतिम छोर पर पानी पहुंचना चाहिए। संचालन समिति के दीपराज गुर्जर ने अधिकारियों से कहा कि वह पूरी तैयारी करे साथ बैठक में आएं। किसानों की समस्याओं का निस्तारण हो आंकड़े बाजी नहीं होनी चाहिए।
इस मौके पर जिला विकास अधिकारी आरएस गौतम, नहर विभाग खंड प्रथम के एसपी सिंह, खंड द्वितीय के राकेश वर्मा, नलकूप के एके गौड़, जिला कृषि अधिकारी चौधरी अरुण कुमार, संतोष अग्रवाल के अलावा अन्य अधिकारी व किसान यूनियन के मंडलीय अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन, भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार सक्सेना, सुभाष चंद्र द्विेदी हरकौती आदि मौजूद रहे।