उरई। बसपा से पूर्व विधायक रहे छोटे सिंह चौहान पर दो लोगों की हत्या करने का आरोप लगा था। लेकिन निचली अदालत ने उनकी छवि को साफ कहते हुए ट्रायल को खत्म कर दिया था। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में जाने पर कोर्ट ने केस को दोबारा खोलने के आदेश दिए हैं। जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
चुर्खी थाना क्षेत्र के बिनौरा गांव निवासी दो सगे भाई राजा भैया व दादा भैया शहर के राजेंद्र नगर में रह रहे थे। 30 मई 1994 को उनकी हत्या कर दी गई थी। उनका कालपी कोतवाली के बैरई ग्राम के रहने वाले छोटे सिंह चौहान और लल्ले गुर्जर से 2 लाख रुपए के लेनदेन के विवाद में विवाद हुआ था। जिस पर हत्या का आरोप छोटे सिंह चौहान और लल्ले गुर्जर सहित 10 लोगों पर लगा था। सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्ज सीट दाखिल की गई थी। मगर 2007 में छोटे सिंह चौहान कालपी से बसपा पार्टी से विधायक चुन कर आए। इसके बाद 2008 में सरकारी वकील ने छोटे सिंह का मुकदमा वापस लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी। इसके बाद निचली अदालत में मुकदमा वापस लेने की अर्जी स्वीकार करते हुए आदेश में कहा कि अभियुक्त छोटे सिंह की छवि लोगों के बीच अच्छी है। वह समाज में प्रतिष्ठित नागरिक हैं। जनता ने उन्हें विधायक चुनकर भरोसा जताया है। मुकदमा वापसी के आदेश को शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। वहीं बाकी 9 अभियुक्तों ने भी अर्जी खारिज होने की चुनौती दी। हाईकोर्ट में 2012 से मामला लंबित था। जिस कारण शिकायतकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। इस मामले में पूर्व विधायक से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।