बिजली विभाग में अफसरों व कर्मचारियों की निष्क्रियता का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। कस्बा रामपुरा में रानी तालाब के पास रखा 250 केवीए का ट्रांसफार्मर मंगलवार की रात फिर से फुंक गया। इससे आधे कस्बे की आपूर्ति गुल हो गई है। ग्रामीणों ने बताया कि एक महीने में तीसरी मर्तबा ट्रांसफार्मर फुंका है। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना के बाद भी 12 घंटे बीत गए हैं, लेकिन अभी तक अफसरों ने कोई सुध नहीं ली। इससे कस्बे में पानी किल्लत बढ़ गई।
कस्बा निवासी नीतू दीक्षित, नवीन त्रिपाठी, महेश सोनी, अरुण तिवारी, सुरेंद्र सोनी, मोनू द्विवेदी आदि ने बताया कि कस्बा रामपुरा के रानी तालाब में 250केवीए का रखा ट्रांसफार्मर मंगलवार रात अधिक लोड के चलते तेज धमाके के साथ फुंक गया। ट्रांसफार्मर फुंकते ही सुभाष नगर, जवाहर नगर समेत आधे कस्बे की बिजली आपूर्ति ध्वस्त हो गई।
ग्रामीणों ने बताया कि समस्या से तुरंत ही बिजली विभाग के छोटे, बडे़ अधिकारियों को अवगत कराकर ट्रांसफार्मर बदले जाने की मंाग की, लेकिन 12 घंटे से अधिक का समय गुजर चुका हैं, लेकिन न तो अधिकारियों ने सुध ली और न ही कर्मचारी मौके पर पहुंचे। इस वजह से आधे कस्बे में भीषण गर्मी में पानी समस्या बढ़ गई और लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों ने अफसरों पर आरोप लगाया कि फुंके हुए ट्रांसफार्मर की रिपयेरिंग कराकर उसे ही रखवा दिया जाता हैं।
यही वजह है कि रानी तालाब पर रखा ट्रांसफार्मर तीसरी मर्तबा फुंका है। एसडीओ सत्येंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ट्रांसफार्मर बदले जाने के लिए दो सदस्यीय कर्मचारियों की टीम को भेजा गया है। बुधवार रात तक नए ट्रांसफार्मर को लगवाकर आधे कस्बे की बिजली आपूर्ति शुरू कराई जाएगी।
इनसेट-
टल गया था बड़ा हादसा
बता दें कि थाने के पीछे स्थित रानी तालाब पर रखे 250 केवीए के ट्रांसफार्मर से कई बार हादसे होते-होते बचे। 20 दिन पूर्व ट्रांसफार्मर में रात के वक्त आग लग गई थी। भीड़भाड़ वाले स्थान में रखे ट्रांसफार्मर में आग लगने से हड़कंप मच गया था। गनीमत यह रही कि आग आधे घंटे बाद बुझ गई, वर्ना बड़ा हादसा हो जाता।
क्षमता बढ़ाने की हो चुकी मांग
थाने के पीछे रखे 250केवीए के ट्रांसफार्मर से रामपुरा क्षेत्र के आधे कस्बे की आपूर्ति होती है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि ट्रांसफार्मर की क्षमता सिर्फ 500 घरों को बिजली आपूर्ति देना है। ग्रामीणों ने बताया कि अधीक्षण अभियंता से लेकर एसडीओ तक से ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाए जाने की मांग की, पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।