मुहम्मदाबाद (जालौन)। लॉकडाउन के चलते जनपद में फूलों की खेती का व्यवसाय व बिक्री करने वालों पर खासा असर पड़ा है। मंदिर, मस्जिद के साथ शादी हो या धार्मिक कार्यक्रम सभी बंद हो जाने के कारण फूलों की खेती करने वाले किसानों और दुकानदारों की तो कमर ही टूट गई है। किसानों को इस बार खेती की लागत तो दूर मेहनत का भी फायदा नहीं मिलता नजर आ रहा है। इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को परिवार के भरण पोषण की चिंता तो सता ही रही है, वहीं नुकसान की आशंका से भी परेशान है।
मंदिरों में पूजा पाठ और शादी ब्याह में सजावट व धार्मिक सामाजिक कार्यों में फूलों की जरूरतों को देखते हुए इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को लॉकडाउन के कारण खासा असर पड़ रहा है। लॉकडाउन के कारण फूलों की बिक्री न होने से फूलों की पैदावार करने वाले किसान भी खासे चिंतित है। फूल बेचने वाले सुरेश माली का कहना है कि लॉकडाउन में मंदिर मस्जिद समेत सभी धार्मिक कार्य बंद हो जाने से फूलों की बिक्री पूरी तरह बंद हो गई है। वह अप्रैल, मई व जून माह में हर साल अच्छा खासा व्यवसाय कर लेते थे। इस व्यवसाय से ही परिवार का भरण पोषण होता था। इस बार लॉकडाउन के चलते न तो फूल माला बिक रही है और न ही शादी में सजावट का काम हो रहा है। जबकि इन महीनों में सहालगों से अच्छा पैसा कमा लेते थे।
फूलों की खेती करने वाले मुहम्मदाबाद के किसान रमेश माली, कुठौंद के किसान ऊदल, अर्जुन, रामकुमार व खरका के मानसिंह राजपूत आदि ने बताया कि वह फूलों की खेती करते हैं। इन महीनों में फसल तैयार रहती है। लॉकडाउन के चलते इस बार फूलों की बिक्री नहीं हो रही है। इससे बाजार में फूलों की मांग नहीं है। इस बार लागत तो दूर मेहनत भी निकलती नजर नहीं आ रही है। इससे किसान मायूस है। किसानों ने बताया कि अप्रैल, मई, जून माह में ढाई सौ रुपये किलो बिकने वाला गुलाब 30 से 35 रुपये किलो बिक रहा है। पचास रुपये किलो वाला गेंदा बीस रुपये में बिक रहा है। किसान मानसिंह ने बताया कि एक बीघा खेत में बीस से 25 क्विंटल तक फूलों की पैदावार हो जाती है।
मुहम्मदाबाद में गुलाब की फसल देखता किसान चंदन सिंह- फोटो : ORAI
शहर में घर के अंदर रखकर फूल बेचता दुकानदार- फोटो : ORAI