500 व 1000 के नोटों को बंद करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सभी विपक्षी दलों द्वारा सोमवार को किया गया भारत बंद का आह्वान जिले में फ्लाप साबित हुआ। दुकानें व व्यापारिक प्रतिष्ठान अन्य दिनों की तरह ही रविवार को भी खुले। आम लोगों ने भी बंद से दूरी बनाए रखी। शायद यही वजह थी कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को छोड़कर अन्य कोई दल
इस बंद में अपनी शक्ति नहीं दिखा सका। उधर, कांग्रेस की ओर से शहीद स्मारक पर दिए गए धरना व सभा के दौरान भी मुट्ठी भर लोग की उपस्थिति ने इस बंद की पूरी पोल ही खोलकर रख दी। गौरतलब है कि नोटबंदी के मुद्दे पर केंद्र की भाजपा सरकार के विरोध में रविवार को सभी विपक्षी दलों ने देश बंद का आह्वान किया था। हालांकि रविवार सुबह किसी
फसाद के डर से अधिकतर दुकानें देर से खुलीं। दस बजते बजते सभी दुकानें व व्यापारिक प्रतिष्ठान पूरी तरह खुल चुके थे। लोग आम दिनों की तरह ही रोजमर्रा की चीजें खरीदते व अपने दफ्तर आदि जाते देखे गए। आटो, रिक्शा आदि भी रोज के दिनों की ही तरह चले। इस दौरान कांग्रेस को छोड़ अन्य कोई दल प्रभावी रूप से नोटबंदी का विरोध करते नहीं दिखाई दिया।
काेंच प्रतिनिधि के अनुसार नोट बंदी पर विपक्षी दलों के भारत बंदी के आह्वान से प्रमुख दलों के किनारा करने से इसकी हवा निकल गई। कोंच के दुकानदारों ने सोमवार को अपने प्रतिष्ठान आम दिनों की ही तरह खोले। दिनचर्या बिल्कुल सामान्य रही। ऐसा लग रहा था जैसे बंदी के आह्वान के बारे में यहां के दुकानदार पूरी तरह से अनभिज्ञ हों। बाजारों में चिपके
पोस्टर और टंगे बैनर मोदी को बधाई देते दिखे। कुछ दुकानदारों ने कहा कि बंदी के विरोध में उन्होंने अपनी दुकानें जानबूझकर खोली हैं। मणिहार बाजार के दुकानदारों संतोष पटवा, नवनीत पाटकार, मनीष पाटकार, कमलेश पाटकार, क्रांति, नीलू वैद, सुमित रिछारिया, सुनील पटवा, अजय पाटकार, अनिल अग्रवाल, गोलू बंसल, दीनदयाल सोनी, अशोक टेलर, दीपू सक्सेना, जितेन्द्र श्रीवास्तव आदि ने तो बाकायदा बैनर टांग कर मोदी के हमकदम होने का दम भरा और ग्राहकों का स्वागत सौंफ-सुपाड़ी खिला कर किया।