उरई/कुठौंद/कालपी/कदौरा। यमुना नदी में आई बाढ़ ने जनपद के 57 से अधिक गांवों के हजारों ग्रामीणों का जीवन बेपटरी कर दिया है। करीब 1400 परिवारों के घर बाढ़ के पानी में डूबे हैं। इन परिवारों को ऊंचे स्थानों पर विस्थापित किया गया है। बाढ़ के साथ ही यह ग्रामीण राशन, बिजली, स्वच्छ पेयजल के साथ ही बीमारियों की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
कालपी में यमुना का जलस्तर अब घटने लगा है। हालांकि अभी यमुना खतरे के निशान से लगभग साढ़े तीन मीटर ऊपर बह रही है। एक दर्जन गांव अभी बाढ़ की चपेट में हैं। यमुना का जलस्तर शनिवार रात से घटना शुरू हो गया है। रविवार शाम 4 बजे यमुना का जलस्तर 111.84 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग के स्थल प्रभारी रूपेश कुमार के मुताबिक यमुना अब 6 से 7 सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से घट रही है। उधर, यमुना पट्टी के एक दर्जन गांव अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं। शहर के आधा दर्जन मोहल्लों में भी बाढ़ का पानी है।
डीएम चांदनी सिंह, एसपी रवि कुमार, एसडीएम अंकुर कौशिक ने कालपी के ग्राम शेखपुर बुल्दा में स्टीमर से पहुंचकर जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से वार्ता कर समस्याएं जानीं। बुखार, खुजली आदि समस्याओं से ग्रामवासियों ने अवगत कराया। उन्होंने सीएमओ डॉ. एनडी शर्मा से कहा कि डॉक्टरों की टीम भेजकर स्वास्थ्य परीक्षण कराकर दवाओं का वितरण कराया जाए। सीएमओ ने ग्रामीणों को दवाइयां वितरण कीं।
इस दौरान राशन किट, बाल्टी आदि सामग्री भी बांटी गई। डीएम ने बताया कि अभी जनपद में 57 गांव ऐसे हैं जो बाढ़ से प्रभावित हैं। लगभग 1400 परिवारों को विस्थापित किया गया है। बाढ़ग़्रस्त गांवों में सामूहिक रसोई संचालित की गई है। लंच पैकेट का भी वितरण कराया जा रहा है। ग्राम शेखपुर बुल्दा में 40 परिवार प्रभावित हैं।
गांवों में परेशानियों की बाढ़, लोगों ने बताया दर्द
कुठौंद में बाढ़ से ब्लॉक के एक दर्जन गांव चपेट में हैं। टिकरी गांव की रानी देवी, ललिता निषाद आदि ने बताया कि बाढ़ की वजह से छत पर रह रहे हैं। रसोई गैस खत्म होने के कगार पर है। किसी तरह समय काट रहे हैं। बाढ़ की वजह से लकड़ी, उपले भीग गए हैं। राशन भी कभी खत्म हो सकता है।
बिजुआपुर गांव के अनिल पाल, आनंद निषाद आदि ने बताया कि घर पर सूखी लकड़ियां खत्म हो गई है। मुश्किल से एक वक्त खाना बन रहा है। भदेख गांव के भगवान सिंह, बलराम ने बताया कि बाढ़ की वजह से दो दिनों से उनके घरों में पानी भरा है। इस समय में उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। हिंनोली गांव के किसान पप्पू पाल ने बताया कि उन्होंने ब्याज पर पैसा लेकर तीन बीघा में सब्जी की फसल और चार बीघा में बाजरा की खेती की थी। बाढ़ से सब कुछ बर्बाद हो गया अब वह बच्चों की फीस और कर्जा कैसे चुकाएंगे।
डेयरी कारोबारी ऋषभ मिश्रा ने बताया कि वह बिजुवापुर, टिकरी, भदेख आदि बाढ़ प्रभावित गांवों से दूध का व्यापार करते थे। सारा व्यापार बंद पड़ा है और किसान भी बहुत परेशान हैं। खंड विकास अधिकारी प्रतिभा शाल्या ने बताया कि वह सभी बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर रही हैं। जल्दी ही व्यवस्था सही हो जाएगी।
कुठौंद के यह गांव हैं बाढ़ प्रभावित
भदेख, टिकरी, करमुखा, बिजुआपुर, खेड़ा मुस्तकिल, हिंनौली, लोहाई, नैनापुर, चौथ, शनगढ़, ऊमरी आदि
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बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए उठे हाथ
नगर में नगर पालिका, मानव कल्याण समाजसेवा संस्थान, घुमंतू हसंतु क्लब की ओर से लंच पैकेट बंटवाए जा रहे हैं। बाढ़ से प्रभावित गुढ़ा खास गांव में प्रधान राजभोज ने भी भोजन बनवाकर बंटवाना शुरू कर दिया है। भाजपा के पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह जादौन ने मंगरौल, नवलपुरा आदि गांवों में लोगों को टार्च, मोमबत्ती, चना, बिस्कुट व राहत पैकेट बांटे। वहीं, प्रशासन भी राहत सामग्री लोगों तक पहुंचा रहा है। कई जगहों पर राहत सामग्री लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है। लोगों का आरोप है कि सही प्रबंधन न होने के कारण यह अव्यवस्था हो रही है।
कदौरा ब्लॉक क्षेत्र के गुलौली, पाली, इकौना व निधान डेरा में बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों व एनजीओ भी आगे आए हैं। रविवार को बीडीओ बृजकिशोर कुशवाहा, ग्राम विकास अधिकारी अभिषेक यादव ने टीम के साथ पाली में राहत सामग्री का वितरण किया। प्रधान प्रतिनिधि इकौना बृजनंदन तिवारी ने चार परिवारों को राशन सामग्री दी। हरचंदपुर गांव के प्रधान दीपक चतुर्वेदी ने ग्रामीणों की मदद से राहत सामग्री का वितरण पाली गांव के झकराई डेरा, पिपरिया डेरा में किया। डॉ. भीमराव आंबेडकर समाज सेवा समिति के अध्यक्ष संजय गौतम ने टीम के साथ इकौना व पाली गांव पहुंचकर राहत सामग्री का वितरण किया।
सिरसा कलार के महेवा ब्लॉक के गांव जीतमऊ में पीड़ितों ने सरकारी स्कूल में शरण ली है। प्रधान ने पीड़ितों के खाने-पीने की मदद उपलब्ध कराई।
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कुसेपुरा में हालात भयावह, टापू पर रह रहे लोग
रामपुरा। कुसेपुरा गांव बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित है। शनिवार को डीएम व एसपी ने भी गांव की हालत देखी थी। गांव के लगभग 500 लोग ऊंचे टापू पर महिलाओं व बच्चों के साथ रह रहे हैं। 50 के लगभग लोग गांव में ही हैं। इन्हें प्रशासन द्वारा राहत सामग्री का वितरण किया गया है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि भानुप्रताप ने भोजन के पैकेट वितरित किए। दूसरी तरफ बिहौड़ व जखेता गांव में अभी तक राहत सामग्री नहीं पहुंची है। इन गांवों के हालात बदतर हैं। गांव में अधिकांश घर बाढ़ के कारण जमींदोज हो चुके हैं। घर में रखा गृहस्थी का सामान भी तबाह हो चुका हैं। घरों में रखा अनाज पानी से सड़ गया है। फिलहाल नदियां धीरे-धीरे घटने लगी हैं। इस पर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। एनडीआरएफ टीमों का रेस्क्यू ऑपरेशन बराबर जारी है। जहां तक बोट पहुंच रही हैं, उनके जरिए राशन सामग्री, लंच पैकेट आदि का वितरण एनडीआरएफ की ओर से किया जा रहा है। नगर पंचायत भी प्रभावित इलाकों के लिए एनडीआरएफ को लंच पैकेट मुहैया करा रही है।
रामपुरा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव
रामपुरा क्षेत्र के निनावली, कुसेपुरा, किशनपुरा, डिकौली जागीर, मिर्जापुरा, बिहौड़, जखेता, भैलावली, कर्रा, मुहब्बतपुरा, गुढ़ा, बेरा, पुरा महटौली, पतराही, हिम्मतपुर, शिवगंज आदि गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।
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सीओ माधौगढ़ ने किया मरीजों का इलाज
रामपुरा। बाढ़ की विभीषिका से जूझते ग्रामीणों को सीओ माधौगढ़ डॉ. देवेंद्र कुमार का भी सहयोग मिला। सीओ पद के दायित्व निवर्हन करते हुए डॉ. देवेंद्र ने नदिया पार के गांव में चिकित्सकों की टीम के साथ बीमार ग्रामीणों का परीक्षण किया। उन्हें दवाइयां देकर भविष्य में बीमारी से बचने के लिए सावधानियां बरतने की सलाह भी दी। बाढ़ का पानी उतरते ही बीमारियों के फैलने का सिलसिला शुरू हो गया है। रविवार को सीओ, एनडीआरएफ व सीएचसी रामपुरा की चिकित्सकों की टीम के साथ नव प्रसूता मां एवं उसके नवजात शिशु को मोटरबोट से लेकर निनावली जागीर गांव पहुंचे। गांव के लोगों को सुरक्षित एवं बेफिक्र होने के लिए आश्वस्त करते हुए चिकित्सा शिविर का आयोजन किया। सीओ ने बीमार लोगों का इलाज कर पुलिस अधिकारी और चिकित्सक होेने (एमबीबीएस) के संयुक्त कर्तव्य का पालन किया। इस दौरान थानाध्यक्ष रामपुरा राजीव कुमार वैस भी मौजूद रहे।
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बाढ़ पीड़ितों के नुकसान की होगी भरपाई
रामपुरा। क्षेत्रीय विधायक मूलचंद निरंजन ने रविवार को बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा कर ग्रामीणों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया। रामपुरा के नदिया पार इलाके को हर साल आने वाली बाढ़ से कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विधायक ने कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सर्वे कराकर ग्रामीणों को मुआवजा दिलाया जाएगा। प्रतिवर्ष नदियों के पानी से रास्ते बंद हो जाते हैं, ऐसे रास्तों को ऊंचा किया जाएगा। बाढ़ से जिनके मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें ऊंचे स्थानों पर बसाने के लिए पीएम आवास योजना का लाभ दिया जाएगा। (संवाद)