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Jalaun News: बिना विकास कराए प्रधान व सचिव समेत पांच ने हड़पी राशि

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उरई। ग्राम प्रधान ने जिम्मेदारों की मिलीभगत से गांव में बिना विकास कार्य कराए ही लाखों का फर्जीवाड़ा कर दिया। ग्राम पंचायत के सदस्यों ने इसकी शिकायत की तो टीम की जांच में पोल खुल गई। जांच टीम ने पाया कि ग्राम प्रधान, तत्कालीन सचिव व तत्कालीन तकनीकी सहायक समेत पांच लोगों ने करीब साढ़े बारह लाख की रकम को बिना काम कराए ही डकार लिया है। डीएम ने डीपीआरओ को एक सप्ताह की मोहलत देते हुए रुपये जमा कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर समय से रुपये जमा नहीं किए गए तो सभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाए।
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महेवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत पाल निवासी तुलसी राम, करन सिंह व रामप्रकाश ने डीएम राजेश कुमार पांडेय से शिकायत की थी। बताया था कि गांव में मनरेगा एवं राजवित्त, केंद्रीय वित्त आयोग के अंतर्गत कराए गए। निर्माण कार्यों में अनियमितताएं हुई हैं। इस पर डीएम ने जालौन एसडीएम की अगुवाई में तीन अधिकारी जांच टीम बनाकर रिपोर्ट देने के लिए कहा। इस पर टीम ने निर्माण कार्यों की जांच की तो पता चला कि पाल मडैया गांव में तालाब खुदाई के कार्य में लेवर का फर्जी भुगतान हुआ है।
तालाब खुदाई में मजदूरों से काम नहीं कराया गया है। वहीं, किनारों पर खोदाई की मिट्टी भी नहीं मिली है। तालाब किनारे लगे बोर्ड में कार्य की स्वीकृति वर्ष 2022-23 में हुई थी। कार्य की लागत एक लाख 93 हजार 92 लिखी थी। वहीं, ग्राम पंचायत के वित्तीय वर्ष 2022-23 कराए गए कार्य का मनरेगा पोर्टल पर प्रदर्शित कार्यों से मिलान किया गया तो उसमें श्रमांश पर 1 लाख 79 हजार 332, सामग्री पर 14 हजार 585 कुल 193917 रुपये स्वीकृत था।
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जांच में पाया गया कि जिम्मेदारों द्वारा इस कार्य में एक लाख तीन हजार तीन सौ 96 रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है। पक्की सड़क से मरघट तक जलरोक बांध के निर्माण कार्य में भी एक लाख 68 हजार 504 रुपये का भुगतान किया गया था। शीतला माता मंदिर के पास समतलीकरण का कार्य मनरेगा के अंतर्गत कराया गया। इसमें बिना मजदूरों के कार्य कराए एक लाख 67 हजार 892 रुपये का भुगतान किया गया।
वहीं, सचिवालय, पंचायत घर में टाइल्स व इंटरलॉकिंग का काम बिना कराए ही भुगतान कर लिया गया। इसके साथ ही ग्राम पंचायत में हैंडपंप रिबोर के कार्य में कोई नया सामान नहीं डाला गया। प्रधान ने सभी रुपयों का भुगतान अपने खाते में करा लिया। टीम ने कागजात मांगे तो वह नहीं दिखा पाए। जांच टीम ने पाया कि शिकायतकर्ता ग्राम पंचायत सदस्यों ने जो शिकायत की हैं, वह सही हैं।
जांच टीम ने रिपोर्ट डीएम को सौंपी तो उसमें पाया गया कि ग्राम प्रधान पान सिंह ने 5 लाख छह हजार छह सौ 26, तत्कालीन सचिव राहुल पहारिया ने 3 लाख 34 हजार 965, तत्कालीन सचिव अमर सिंह ने एक लाख 71 हजार 665, तत्कालीन तकनीकी सहायक नंद किशोर नायक ने एक लाख 47 हजार 549 रुपये व तत्कालीन तकनीकि सहायक जगदीश प्रसाद गोस्वामी ने 83440 रुपये की गड़बड़ी की है। इन सभी से 12 लाख 44 हजार 245 रुपये की वसूली की जाएगी। डीएम राजेश कुमार पांडेय ने डीपीआरओ राम अयोध्या प्रसाद गुप्ता को निर्देश दिए कि एक सप्ताह के अंदर इस धनराशि की वसूली की जाए। अगर वसूली नहीं होती है तो उक्त पांचों लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाए।



हैंडपंप रिबोर कराए बिना प्रधान ने अपने खाते में डलवा लिए रुपये
ग्राम प्रधान पान सिंह ने सचिव व अन्य लोगों की मिलीभगत से ग्राम पंचायत में हैंडपंप रीबोर के लिए आए रुपये का बंदरबांट कर लिया। हैडपंपों का गांव में रिबोर नहीं कराया गया जबकि भुगतान प्रधान ने अपने खाते में ही करा लिया। शासनादेश में स्पष्ट है कि अपने सगे संबंधियों की फर्म या स्वयं कोई भुगतान नहीं किया जाए। इसके बाद भी प्रधान ने अपने ही खाते में भुगतान करवा लिया।


वर्जन

जांच में गड़बड़ी पाई गई है। सभी से वसूली के आदेश दिए गए हैं। एक सप्ताह के अंदर अगर धन की वसूली नहीं हुई तो सभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। साथ ही अन्य मामलों में जांच कराई जा रही है। जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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राजेश कुमार पांडेय, डीएम जालौन
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