मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड योजना शुरू की है। इसमें मत्स्य पालक के लिए आवंटित तालाब की मरम्मत कराई जाएगी। इसके लिए शासन को डिमांड भी भेजी गई है। योजना पर काम करने के लिए बजट में पचास फीसदी अनुदान और पचास फीसदी पट्टा धारक का अंशदान रहेगा। जनपद में तालाबों की संख्या
राजस्व ग्रामों में 800 से अधिक है लेकिन 529 का ही मत्स्य पालन के लिए आवंटन हुआ है। इसमें 350 में ही पालन किया जा रहा है। पट्टा लेने के बाद भी पट्टा धारक मत्स्य पालन के लिए आगे नहीं आए। इसमें बताया जा रहा कि तालाबों में पानी भरने के कहीं पर इंतजाम नहीं है तो कहीं पर तालाब सुरक्षित नहीं है। केंद्र सरकार की नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड
योजना से तालाबों की मरम्मत कराकर उन्हें मत्स्य पालन के लिए तैयार किया जाना है। तालाब पर आने वाला खर्च का पचास फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार से अनुदान पर मिलेगा
जबकि पचास फीसदी तालाब पट्टा धारक को अंशदान के रूप में लगाना पड़ेगा। इसके लिए विभाग की ओर से चार तालाबों की डिमांड शासन को भेजी गई है। इसमें से सुढ़ार,बरदौली, जैसारी कलां व पमां गांव के तालाब शामिल है। अभी तक शासन से स्वीकृति विभाग को प्राप्त नहीं हुई है।
बोले जिम्मेदार
नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड योजना के अंर्तगत चार तालाबों की डिमांड शासन को भेजी गई है। इस योजना में पचास फीसदी अनुदान शासन से देने का प्रावधान है जबकि पट्टा धारक को 50 फीसदी अंशदान देना पड़ेगा। बजट आने पर आगे काम किया जाएगा।
हरीचंद्र वर्मा
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य पालन विभाग जालौन