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फाइलेरिया की दवा खाने से इनकार, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने समझाया तब माने

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फाइलेरिया की दवा खाते लोग - फोटो : ORAI
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उरई। फाइलेरिया उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे अभियान के दौरान टीम से कई जगह लोगों ने दवा खाने से इंकार कर दिया। बाद में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के समझाने पर लोग मान गए और उन्होंने दवा भी खा ली। सीएमओ डा. अल्पना बरतारिया ने कहा कि दवा को लेकर किसी तरह का भ्रम न पालें। यह दवा पूरी तरह से हाथी पांव और पेट के कीड़े निकालने के लिए मुफीद है। इस दवा का असर एक साल तक रहता है।
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एसीएमओ डा. सत्यप्रकाश ने बताया कि शहर के कुछ इलाकों में फाइलेरिया की दवा खिलाने गई टीम को मोहल्ले के लोगों से विरोध का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को इसे लेकर मस्जिदों में जुमे की नमाज के बाद मौलानाओं ने दवा के बारे बताकर लोगों से अनुरोध किया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है। इसी के साथ अधिकारियों ने भी लोगों को समझाया तब कही जाकर लोग दवा खाने के लिए राजी हुए।
एसीएमओ ने बताया कि 17 फरवरी से जिले में दवा खिलाई जा रही है। जिले में साढ़े 15 लाख लोगों को दवा खिलाई जानी है। अब तक चार लाख से ज्यादा लोगों को दवा खिलाई जा चुकी है। पेट के कीड़े निकालने के लिए एल्बेंडाजोल एवं फाइलेरिया की रोकथाम के लिए डीईसी की दवा खिलाई जा रही है। यह दवा एक साल तक असरदार रहती है। उन्होंने बताया कि दवा खिलाने के बाद यदि किसी को चक्कर आदि आते हैं तो यह माना जाता है कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के बैक्टीरिया है, जिन पर दवा असर कर रही है। उन्होंने बताया कि ये दवा दो साल से कम आयु के बच्चों को, गर्भवती महिला, गंभीर रुप से बीमार व्यक्ति को नहीं खानी है। दवा खिलाने का अभियान 29 फरवरी तक चलेगा। इसके बाद छूटे हुए लोगों को दो मार्च तक दवा खिलाई जाएगी।
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