गोहन। धान की नर्सरी तैयार है। बारिश की कमी से किसानों के सामने पहले ही संकट है। अब बिजली कटाैती के साथ ही रजपुरा माइनर में पानी न आने की वजह से किसानों की मुसीबत और बढ़ गई है। ग्रामीण कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन बिजली विभाग सुनवाई नहीं कर रहा है।
किसानों की हजारों बीघा खड़ी धान की फसल सूखने की कगार पर है। सिंचाई के लिए बिजली 10 घंटे बिजली देने का नियम है, लेकिन क्षेत्र के शहबाजपुर, रमधौरा, पडकुला, कासिमपुर, रूपापुर, कुंडऊ सहित दर्जनों गांवों में महज चार से छह घंटे ही बिजली मिल रही है। वह भी बहुत कम वोल्टेज के साथ। ऐसे में नलकूप नहीं चल पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि मौसम की बेरुखी के बीच नहरों में पानी का अभाव के साथ साथ बिजली की कम सप्लाई आने से ऐसे में धान की खेती कैसे होगी।
बताया कि प्रति बीघा धान की रोपाई में पांच से छह हजार रुपये से अधिक की लागत लगती है, यदि पानी फसल को पर्याप्त मात्रा में समय पर मिल जाता है तो अच्छी पैदावार भी हो जाती है। किसान रामस्वरुप राजपूत, सुरेंद्र राजपूत , रामौतार कुशवाहा, विक्रम कुशवाहा, सतीश राजपूत, पतलेष राजपूत, गंभीर राजपूत, मंगल कुशवाहा, राजू दोहरे ने मांग की कि नलकूप के लिए कम से कम बिजली की सप्लाई 15 से 16 घंटे सप्लाई की व्यवस्था की जाए ताकि नलकूप चल सके और फसल को पानी मिले।