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किसान करें पहरा, खेतों से हाईवे तक मवेशियों का डेरा

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कदौरा। ब्लाक क्षेत्र में अन्ना मवेशी फसलें चर किसानों को तबाह कर रहे हैं। यह हाईवे और संपर्क मार्गों पर जान का खतरा बने हैं। इनकी चपेट में आने से अक्सर हादसे हो रहे हैं।
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कदौरा हाईवे के अलावा जोल्हूपुर से आटा और कालपी तक हाईवे पर घूमते अन्ना मवेशी हादसों की बड़ी वजह बन रहे हैं। लॉकडाउन से पहले सूबे की सरकार के मंत्रियों और जनपद के अधिकारियों ने अन्ना मवेशियों से निजात दिलाने का दावा किया था। यह दावा हवाई साबित हुआ। सर्दियों के दिन आने वाले हैं। हर बार की तरह इस बार भी किसानों को चना, मटर की फसलों को बचाने के लिए सर्द रातों में खेतों पर पहरा देना पड़ेगा।
करोड़ों रुपये खर्च, समस्या जस की तस
कदौरा ब्लाक में अन्ना मवेशियों के लिए करीब 50 गोशालाएं तैयार की गई हैं। इनमें से कुछ जमीन के विवाद में फंसी हैं। कुछ में मवेशियों के लिए चारे पानी का इंतजाम न होने से सन्नाटा पसरा हुआ है।
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ये गांव हैं सबसे ज्यादा प्रभावित
कांशीरामपुर, लमसर, बरही, सुरोला, परोसा, हरचंद्रपुर, उदनपुर, खुटमिली, चतेला, गररेही, मरगांया, बारा सहित अन्य गांवों में हर जगह मवेशियों के झुंड देखे जा सकते हैं।
10 लाख का नुकसान, किसानों में हो चुका टकराव
रबी की पिछली फसल में किसानों को अन्ना मवेशियों के आतंक का सामना करना पड़ा था। किसानों को लगभग 10 लाख की मटर, चना, गेहूं आदि की फसलों में नुकसान सहना पड़ा था। कई जगह किसान सड़कों पर उतर आए थे। गोशालों में ताले डालकर मवेशियों को स्कूल में बंद कर दिया गया था। अन्ना मवेशियों को खदेड़ने पर किसानों में टकराव और फायरिंग भी हुई थी।
मवेशियों के अड्डे बन रहे हादसों के प्वाइंट
उदनपुर, बागी, परोसा, बवीना, बरही, लमसर, पथरेहटा आदि गांवों को जाने वाले मार्ग पर जगह-जगह मवेशियों के अड्डे हैं। यहां आए दिन हादसे होते हैं। करीब आठ माह पहले स्टैंड के पास बाइक सवार की मवेशी से टक्कर हो गई थी। हादसे में बाइक सवार की जान चली गई थी। करीब छह माह में दस से पंद्रह वाहन सवार मवेशियों के कारण घायल हो चुके हैं।
एक नजर में ब्लाक की स्थिति
गांव करीब 70
किसान 2 से 3 हजार
गोशालाएं 50
मवेशी 1000- 1200
किसानों से बयां किया दर्द
फोटो-6 सिद्धगोपाल।
जमरेही के किसान सिद्धगोपाल का कहना है कि गोशालाएं होने के बाद भी बड़ी संख्या में अन्ना मवेशी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। किसान मुश्किल से खाद, बीज, जुताई बुआई के लिए पैसों का इंतजाम कर फसलें तैयार करते हैं। मवेशी इन्हें चट कर जाते हैं।
फोटो-7 वेद प्रकाश।
कस्बे के किसान वेद प्रकाश पाठक ने बताया कि अन्ना मवेशी रात में सड़कों पर हाईवे पर बैठ जाते हैं। अचानक सामने से मवेशी आ जाने से वाहन चालक बेकाबू होकर हादसे का शिकार हो जाते हैं। गोशाला होने के बाद भी पशु पालक मवेशी छोड़ देते हैं।
फोटो-21 अतिरंजन।
बीडीओ अतिरंजन सिंह ने बताया कि गोशालाओं के विवाद निपटाने के लिए दो टीमें गठित की गई हैं। जहां मवेशियों के छुट्टा घूमने की शिकायतें मिली हैं, वहां के सचिवों और प्रधानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। डीएम को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया गया है।
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