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किसानों की परेशानी, पलेवा को नहीं पानी

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आटा का साल भर से खराब पड़ा ट्यूबवेल - फोटो : ORAI
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उरई। रबी की बुआई का समय शुरू हो चुका है पर अभी कहीं नहरें सूखी हैं तो रजबहों में भी पानी की कमी है। अधिकांश ट्यूबवेल या तो पहले से ही खराब पड़े हैं या फिर उनमें अभी तक बिजली का कनेक्शन ही नहीं है। ऐसे में किसानों के सामने पलेवा की समस्या बनी है।
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किसानों का कहना है कि कभी बारिश तो कभी अन्ना मवेशी और कभी सूखा उनकी फसलों पर संकट बनकर खड़ा ही रहता है। अब यदि जल्द ही फुल गेज से पानी नहीं शुरू किया गया तो इस बार भी फसल से लगी उम्मीदों पर पानी फिरना तय है। जहां पर फुल गेज से नहरें नहीं चल रही हैं, वहां पर किसानों को किराए के ट्यूबवेल से पानी का जुगाड़ करना पड़ रहा है, जिससे फसल की लागत भी बढ़ रही है।
बोले, क्या करें बुआई का समय अक्तूबर माह का होता है और अब नवंबर शुरू हो गया है। ऐसे में भी नहरों और रजबहों का सूखा होना उनके माथे की लकीरों को भी और भी गहरा कर रहा है। नहर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बीस अक्तूबर से पानी शुरू कर दिया है, जिन स्थानों पर अभी भी समस्या है, वहां का सर्वे कराकर उसे जल्द ही दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
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50 गांवों के किसान बिन पानी परेशान
कदौरा। किसान वेदप्रकाश पाठक, उमाकांत तिवारी, सुभाष सिंह, बलवीर कुशवाहा, लक्ष्मीकांत, अभिषेक गुप्ता, रंजीत सिंह आदि का कहना है कि मटर की फसल तो बगैर पलेवा के बो दी है पर गेहूं की फसल बोने के लिए पहले खेतों की पलेवा करना जरूरी है, पर यहां नहरों में पानी नही है और बंबी भी सूखी पड़ी हैं। रही सही कसर बिजली विभाग ने पूरी कर रखी है, कभी फाल्ट तो कभी रोस्टिंग के कारण ट्यूबवेल से भी पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। पलेवा न होने से बवीना, परोसा, इटौरा, बावनी, हरचंद्रपुर, बागी, उदनपुर खुटमिली, उकुरवा, जमरेही, सोंधी, मवई अहीर सहित करीब 50 गांवों के किसान परेशान हैं। कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई पर कोई समाधान नहीं हुआ।
मटर के साथ गेहूं की फसल पर भी संकट
सिरसाकलार। बता दें कि पंद्रह नवंबर से गेहूं की बुआई चालू होनी है। इससे पहले आर्किल मटर, लाही, चना, मसूर आदि की बुआई के लिए पलेवा होना जरूरी है। जखा के किसान ब्रजेंद्र सिंह, मलथुआ के शिवसिंह, जहटौली के मेहरबान सिंह, भिटारी के रामपाल सिंह का कहना है कि अगर रजबहे में समय से पानी न छोड़ा गया तो तिलहन, दलहन और गेहूं तक की समय से बुआई नहीं हो सकेगी। जिससे उपज कम होने की आशंका बनी रहेगी और खेती एक बार फिर घाटे का सौदा साबित होगी। किराए के ट्यूबवेल से पानी लेना हर किसी के बस की बात नहीं हैं। वहीं नहर द्वितीय के अवर अभियंता सोहनलाल का कहना है कि रजवाहे में पानी छोड़ा जा चुका है, सप्ताह भीतर फुल गेज से भी पानी छोड़ा जा सकता है।
साल भर से खराब पड़ा है ट्यूबवेल
आटा। क्षेत्र में लगा 195 सरकारी ट्यूबवेल करीब एक साल से खराब पड़ा है। जिससे पहले लगभग 200 एकड़ भूमि सिंचित की जाती थी। आसपास की नहरों और रजबहों में भी पानी की कमी है, ऐसे में ट्यूबवेल ही किसानों का सहारा बनाता था। बिना पानी के अभी तक खेतों में पलेवा नहीं हो सका है। किसान रामशंकर तिवारी, वीरेंद्र तिवारी, दीपू, कल्लो, संतोष, ज्वाला, माताप्रसाद, सुनील तिवारी आदि का कहना है कि अधिकारी कुछ भी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। किसानों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। बिना पलेवा को बुआई शुरू ही नहीं हो सकेगी। एक तो अन्ना मवेशी पहले ही समस्या बने हुए हैं, रही सही कसर इस खराब ट्यूबवेल ने पूरी कर रखी है।

कदौरा में बिना पानी सूखी पड़ी बंबी- फोटो : ORAI

सूखा पड़ा तरसौर का रजबहा- फोटो : ORAI

सिरसा कलार में पलेवा बिना सूखे पड़ा खेत- फोटो : ORAI

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