औसत से कम बारिश व अधिक जल दोहन से पानी का स्तर खिसकता जा रहा है। हालात
यह हैं कि सर्दी के मौसम में ही जनपद के कई इलाकों में पानी का संकट खड़ा
हो गया है। किसी क्षेत्र में 70 तो कहीं 100 फीट तक जल स्तर गिर गया है।
गिरते जलस्तर का ही असर है कि हैंडपंप दम तोड़ने लगे हैं। नलकूपों ने भी
पानी देना कम कर दिया है, जिससे संकट बढ़ने लगा है। ग्रामीण इलाकों में
लोगों को एक बाल्टी पानी के लिए दूर तक जाना और कुओं व हैंडपंपों पर घंटों
लाइन
लगाना पड़ रही है। गिरता जल स्तर जलसंस्थान व जलनिगम के अधिकारियों के
लिए भी परेशानी का विषय बनता जा रहा है। एक दशक में दो वर्षों को
छोड़ दिया जाए तो औसत से कम बारिश हो रही है। तीन मर्तबा तो जनपद सूखा
ग्रस्त घोषित हो चुका है। कम बारिश, अधिक जल दोहन का ही असर है कि जल स्तर
में तेजी से गिरावट आ रही है। वर्ष 2014 में औसत वर्षा 962 मिमी के सापेक्ष
586.20 मिमी रही। इसके अलावा मौजूदा वर्ष में 480.65 मिमी बारिश हुई है।
कम
बारिश का ही असर है कि जून पानी का संकट खड़ा होता था वह स्थिति दिसंबर
में ही आ गई है। माधौगढ़ क्षेत्र हो या फिर डकोर सभी जगह हैंडपंपों ने पानी
देना कम कर दिया है। कई हैंडपंपों ने पानी देना ही छोड़ दिया है। नलकूपों
से भी पानी कम हो गया है। ऐसे स्थिति में पानी के लिए संघर्ष होना
स्वाभाविक माना जा रहा है। किसानों को भी पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा
है।
हैंडपंप में बढ़ाए जा रहे पाइप
सूखा के कारण भूगर्भ
जलस्तर गिरता जा रहा है। जिससे हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं। इन हैंडपंपों
में पाइप डलवाने का काम जलसंस्थान करा रहा है। मौजूदा समय में 10 हैंडपंप
तो ऐसे हैं जिसमें 10-10 फुट वाले दो-दो पाइप डाले गए हैं। इसके बाद
इन्होंने पानी देना शुरू किया है।
29 नलकूपों पर पड़ा असर
जलसंस्थान
के 29 नलकूपों पर जलस्तर गिरने का असर पड़ा है। पेयजल परियोजनाओं के
संचालन को स्थापित किए गए नलकूपों ने जब पानी देना बंद किया तो विभाग ने
जांच कराई। इसमें पाया कि जलस्तर खिसक गया है जिससे समस्या आई। जिले भर में
सरकारी नलकूपों में दो-दो पाइप बढ़ाकर संचालन शुरू कराया गया है।
...तो पानी के लिए होगा कोहराम
जिस
गति से जलस्तर गिर रहा है उससे लग रहा है कि आने वाले समय में पानी के लिए
कोहराम मच जाएगा। एक बाल्टी पानी के लिए अभी भी कई इलाकों मे लोगों को
परेशान होना पड़ता है। यह तब है जब पानी की आवश्यकता कम पड़ती है। अप्रैल,
मई और जून में तो पानी का संकट हर गली में नजर आएगा।
इन इलाकों में अधिक संकट
डकोर
के एक दर्जन गांव ऐसे है जहां पानी का संकट है। इसमें काबिलपुरा, कैंथेरी,
गिरथान, नुनसाई, सोमई आदि गांव शामिल हैं। इसके अलावा सरावन, कुरसेड़ा,
पड़कुला, अमखेड़ा गांव एसे है जहां पर नलकूप पानी छोड़ रहे हैं। इससे
समस्या गंभीर हो रही है।
पंखा उतारा, नीचे बढ़ाए पाइप
-सरावन
गांव निवासी किसान शंकर कुशवाहा ने अपने खेत पर नलकूप लगवाया था। पलेवा
करने के दौरान ही नलकूप ने पानी देना बंद कर दिया तो वह परेशान हो उठे।
उनका कहना है कि पंखा पहले से ही 10 मीटर पर लगा था और अब 10 मीटर और नीचे
ले जाना पड़ा। दो पाइप भी बढ़ाने पड़े तब जाकर पानी शुरू हो पाया।
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कुरसेड़ा गांव निवासी केपी सिंह का कहना है कि तीसरी बार पंखा नीचे उतार
रहे है। बोरिंग पानी छोड़ रही है। पहली बार 5 मीटर और अब तो 10 मीटर पंखा
और नीचे ले जाना पड़ रहा है। यह अकेली केपी सिंह की समस्या नहीं है बल्कि
ऐसे कई किसान है जो ये कवायद करने को मजबूर हैं
वर्जन
अधिक दोहन से
भूगर्भ जलस्तर गिर रहा है जिससे हैंडपंप व नलकूप पानी देना छोड़ रहे हैं।
जिन हैंडपंपों व नलकूपों ने पानी देना कम किया है उनमें पाइप बढ़वाए जा रहे
हैं। इस समय 20 से 30 मीटर तक जल स्तर में गिरावट आई है। इस कारण दो-दो
पाइप बढ़ाए जा रहे हैं।- बीएन सिंह, अधिशाषी अभियंता, जलसंस्थान, जालौन
जलस्तर
में कितनी गिरावट आ रही है इसके लिए सर्वे कराया जा रहा है। एक दो दिन में
एवरेज फाइनल कर दिया जाएगा। अनुमानित 18 से 25 मीटर तक जलस्तर नीचे खिसका
होगा।- रामजी शर्मा फील्ड असिस्टेंट मंडल झांसी