उरई। चैत्र नवरात्र, नववर्ष और नव सवंत्सर 2080 का शुभारंभ 22 मार्च बुधवार से हो रहा है। शुभ मुहूर्त में ही कलश की स्थापना करें।
पंडित कपिल शास्त्री ने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टि की रचना का प्रथम दिवस माना जाता है। यह वर्ष की सबसे पवित्र तिथि होती है। चैत्र नवरात्र में रोजाना मां भगवती दुर्गा और माता गौरी के दर्शन और पूजन करना चाहिए। 22 मार्च को कलश स्थापना का मुहूर्त अमृतकाल में प्रात: काल 6.15 बजे से 9.20 बजे के मध्य रहेगा। शुभ मुहूर्त 10.50 बजे से 11.55 बजे तक रहेगा। लाभ काल सायं 4.50 बजे से छह बजे तक रहेगा। 22 मार्च को राहुकाल दोपहर 12.20 बजे से 1.50 बजे तक रहेगा। राहुकाल के समय को छोड़कर किसी भी समय कलश स्थापना की जा सकती है।
नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कुष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठवें दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन सिद्धि धात्री के दर्शन और पूजा करनी चाहिए। 30 मार्च को रामनवमी पर्व पर दोपहर 12 बजे राम जन्मोत्सव मनाया जाएगा।